दिनाँक 6 फरवरी 2018, स्थान - श्री हनुमान मंदिर प्रांगण कैथा, गढ़/गंगेव रीवा मप्र।
(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)
कैथा की पावन भूमि पर आयोजित हो रही शिवमहापुराण की कथा में दिनाँक 6 फरवरी को रुद्र संहिता का सती एवं पर्वतीखण्ड का प्रसंग चल रहा है।
इस बीच कथा में सती का अपने पिता दक्ष के यज्ञ में बिना आमंत्रण के रुद्ररहित यज्ञ का आरंभ एवं सती का दक्ष के प्रति कोप एवं ज्वालामुखी की उत्पत्ति, सती के 12 मास तक शिवव्रत आचरण और उसके बाद ब्रह्मा एवं विष्णु द्वारा कैलाश पहुचकर शिवजी की स्तुति करना, ब्रह्मा एवं विष्णु की स्तुति के उपरांत शिवजी द्वारा जगत कल्याण की दृष्टि से सती से विवाह करना स्वीकार करना, दक्षयज्ञ में सती का अपमान एवं सती का देह त्याग, पुनः सती का अवतरण एवं हिमालय कन्या के रूप में जन्म, तारकासुर नामक असुर की उत्पत्ति एवं असुर द्वारा उत्पात, देवताओं द्वारा ब्रह्मा की स्तुति करना एवं ब्रह्मा द्वारा इस निमित्त शिव पार्वती के विवाह उपरांत पुत्र द्वारा तारकासुर वध का प्रसंग, इंद्र द्वारा कामदेव रति को शिव की समाधि भंग करने वास्ते भेजना, शिव द्वारा कामदेव रति को भष्म कर देना फिर ब्रह्मा इन्द्रादि देवताओं की प्रार्थना पर पुनः जीवन देना और शिव का अंतर्ध्यान होना, पार्वती को नारद द्वारा शिव पंचाक्षर मन्त्र का उपदेश, पार्वती द्वारा शिव की घोर तपश्या आदि कथा प्रसंगों का सुंदर वर्णन चल रहा है।
शिव हैं अजन्मा अविनाशी, महायोगी, त्यागमूर्ति महादेव -
ईश्वर अजन्मा, अविनाशी, सर्वज्ञ, सर्वव्यापी, त्रिकालदर्शी, त्रिगुणात्मक प्रकृति के परे एवं अवस्थातीत है। उसी ईश्वर के अनन्त रूपों एवं नामो में शिव एक नाम हैं। परमेश्वर के शिवरूप की आराधना उपासना करने से हमारे अंदर शिव के ही गुण आते हैं। शिव का संस्कृति में अर्थ होता है कल्याणकारी अर्थात लोक कल्याणकारी शिव अर्थात न तो उनका जन्म होता और न ही विनाश इसीलिए यह अविनाशी और अजन्मा हैं। शिव त्रिगुणात्मक प्रकृति सतोगुण, रजोगुण एवं तमोगुण से परे हैं। सती प्रसंग के उपरांत शिव समाधिस्थ हो गए तब सम्पूर्ण ब्रह्मांड में त्राहि त्राहि मच गई। अंधकार, असत्य, असुर प्रकृति का आधिक्य होने पर शिव ही हैं जो इन सबका संहार कर सतोगुण की स्थापना करते हैं और जैसे ही शिव समाधिस्थ हुए वैसे ही असुर प्रवित्तियाँ फैल गईं ऐसे में सभी देवी देवता मॉनव गंधर्व इन असुर शक्तियों से आतंकित हुए। ऐसे में ब्रह्मा और विष्णु इन्द्रादि देवताओं के लिए सृस्टि चलाने का संकट उत्पन्न हो जाता है और फिर विधि के विधान और सृष्टि चलाने वास्ते शिव की समाधि खोलने के तौर तरीके अपनाए जाते हैं।
पावन स्थली कैथा के श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।
संलग्न - श्रीशिवमहापुरण कथा में उपस्थित श्रोतागण और कार्यक्रम की फ़ोटो।
- शिवानंद द्विवेदी, संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत
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