Wednesday, 28 February 2018

श्रीहनुमान मन्दिर कैथा में होली के पावन अवसर पर पूर्णिमा को आयोजित होगा सीताराम संकीर्तन का कार्यक्रम

दिनाँक 28 फरवरी 2018, स्थान - पावन यज्ञस्थली कैथा से, रीवा मप्र।

  (शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

     कलयुग के देवता एवं पवनपुत्र बजरंगबली जी के संरक्षण एवं अध्यक्षता में दिनाँक 1 मार्च से 2 तक होली के पावन अवसर एवं पूर्णिमा के अवसर पर परंपरागत रूप से आयोजित होने वाले अखंड 24 घण्टे के कार्यक्रम के तारतम्य में इस बार सीताराम संकीर्तन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

     श्रीहनुमान मन्दिर प्रांगण में आयोजित होने वाले सभी सार्वजनिक कार्यक्रम जीव कल्याण एवं विश्व शांति के उद्देश्य से किये जाते हैं जो श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत के तत्वावधान में सम्पन्न होते हैं।

         कार्यक्रम के विशेष सहयोगियों में कैथा से भैयालाल द्विवेदी, सिद्धमुनि द्विवेदी, लालबहादुर पटेल, संतोष केवट, नंदलाल केवट, गोकुल केवट, वृजभान केवट, सोरहवा से अरुणेंद्र पटेल, राम नरेश पटेल, करहिया से दिनेश लोनिया, संजय लोनिया, अजय तिवारी, सहित अन्य भक्त श्रद्धालुगण हैं।

    संलग्न - कैथा श्री हनुमान मन्दिर प्रांगण के कार्यक्रम की तस्वीर।

    - शिवानंद द्विवेदी संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत, 

    मोब 7869992139

Tuesday, 13 February 2018

श्री हनुमान मंदिर प्रांगण कैथा में बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ 15 दिवशीय महाशिवरात्रि महोत्सव 2018 (देखें हवन एवं भंडारे की तस्वीरें)

दिनांक 14 फरवरी 2018, श्री हनुमान मंदिर प्रांगण कैथा से, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

      धन्य है कैथा की पावन भूमि और यहां पर साक्षात  उपस्थित कलयुग के देवता पवनपुत्र श्री बजरंगबली जी जिनकी कृपा से यहां पर सतत यज्ञ, हवन, मानस, महापुराण, और भंडारे चलते रहते हैं। प्रभु की प्रेरणा से यहां आसपास ग्राम क्षेत्रों के भक्तगण अपनी महती भूमिका निभा रहे हैं।

      अभी पिछले दिनों दिनांक 31 जनवरी से प्रारंभ हुआ महाशिवरात्रि महोत्सव 2018 का विशेष आयोजन दिनाँक 13 फरवरी को विशाल हवन एवं भंडारे के साथ संपन्न हुआ। शेष बचे हुए कार्यक्रम में विसर्जन एवं विदाई 14 फरवरी को सम्पन्न हुई जिसमे समस्त आवाहित देवी देवताओं को परंपरा अनुरूप विसर्जित कर विदाई दी गई। परंपरा अनुरूप चौथी एवं दहकन्दों का कार्यक्रम भी 14 फरवरी को सम्पन्न हुआ इस बीच पुनः एक सूक्ष्म भंडारे का आयोजन 14 फरवरी को भी किया गया।

     इस पूरे आयोजन में कैथा, सोरहवा, मिसिरा, करहिया, बड़ोखर, डाढ़, हिनौती सहित दर्जनों नजदीकी ग्रामों के भक्त श्रद्धालुगणों ने  बढ़ चढ़ कर योगदान दिया।

      ये समस्त आयोजन अपने आप मे विशिष्ट हैं क्योंकि इन आयोजनों में हिन्दू समाज के हर जाति वर्ग के लोग अपना अपना यथासंभव योगदान देते हैं। सभी कार्यक्रम सार्वजनिक रूप के होते हैं जो श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति के तत्वावधान में सम्पन्न होते हैं।

यज्ञों में हवन है वैज्ञानिक पद्धति, वातावरण को स्वच्छ बनाकर ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करता है वैदिक हवन - 

    वास्तव में देखा जाए तो समस्त वैदिक उपचार, हवन, यज्ञ आदि पद्धतियां अपने आपमे एक वैज्ञानिकता पिरोए हुए हैं। प्राचीन काल से ही बारिस कराने और वातावरण को स्वच्छ बनाये रखने के लिए हवन यज्ञ आदि वैदिक पद्धतियों का सहारा लिया जाता रहा है जिसके पुराणों और ग्रंथों में पर्याप्त सबूत मिलते हैं। निश्चित तौर पर यदि आज के वैज्ञानिक तथ्यों और प्रयोगों को भी माना जाए तो यह बात सिद्ध हो चुकी है कि हिन्दू वैदिक परंपराओं में क्रियान्वित होने वाली यज्ञ और हवन से वातावरण शुद्ध होकर हानिकारक कीटाणुओं बैक्टीरिया आदि नष्ट होकर ग्लोबल वार्मिंग नियंत्रित होता है।

      जहां तक धार्मिक दृष्टि का प्रश्न है तो प्रत्येक हिन्दू धर्मावलंबी के लिए किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में हवन करना अत्यंत विशेष एवं महत्वपूर्ण माना गया है।

   संलग्न - हवन भंडारे कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें।

  - शिवानंद द्विवेदी, संयोजक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत। 7869992139

Rewa, MP - श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण कैथा में महाशिवरात्रि महोत्सव अंतर्गत चल रहा विशाल हवन और भण्डारा का कार्यक्रम

दिनांक 13 फरवरी 2018, स्थान - पावन यज्ञस्थली श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण कैथा से, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

   पावन यज्ञस्थली कैथा के अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में दिनांक 31 जनवरी से प्रारंभ हुआ शिवमहापुराण महायज्ञ अपने समापन की तरफ है। दिनांक 13 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन हवन और भंडारे का कार्यक्रम चल रहा है।


      कैथा की पावन भूमि कई मायनो में एक विशिष्ट स्थान है जहां पर श्री हनुमान जी स्वामी की अत्यंत प्राचीन प्रतिमा है और इन्ही के आशीर्वाद से कैथा और उसके आसपास स्थित पचासों ग्रामों के भक्त श्रद्धालु प्रेरणा पाकर श्रावण मास, नवरात्रि पर्व, महाशिवरात्रि पर्व आदि में उपस्थित होकर विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साक्षी और सहयोगी बनते हैं।

संलग्न - संलग्न तस्वीरों में हवन एवं भंडारे के कार्यक्रमों में उपस्थित एवं सहयोगी भक्तगण।

   - शिवानंद द्विवेदी, संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति, भारत। 7869992139


Sunday, 11 February 2018

Rewa, MP - महाशिवरात्रि महोत्सव अंतर्गत श्रीहनुमान मंदिर कैथा में प्रत्येक शायं आयोजित हो रहा रामायण भजन का कार्यक्रम

दिनांक 12 फरवरी 2018, स्थान - पावन यज्ञस्थली श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण कैथा से, गढ़/गंगेव, रीवा मप्र।

 (शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

    पावन यज्ञस्थली कैथा में आयोजित महाशिवरात्रि महोत्सव अंतर्गत श्रीशिवमहापुरण भक्ति-ज्ञान महायज्ञ के दौरान प्रति शाम भजन एवं रामायण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी कड़ी में पिछले दिनों क्षेत्रीय गायक वादकगणों ने उपस्थित होकर सुंदर भजन एवं रामायण की प्रस्तुतियां दीं।

    पनगड़ी से पधारे आत्मानंद एवं बद्री पांडेय ने शानदार भजन की प्रस्तुतियां दीं। इसी बीच करहिया से दिनेश एवं रामकृष्ण लोनिया ने भी सुंदर गायन की प्रस्तुतियां दीं। कैथा से बंसपति साकेत ने ढोलक में सभी गायकों का सहयोग किया। दिनाँक 12 फरवरी की शाम को भी उपस्थित कलाकारों द्वारा भजन एवं रामायण की प्रस्तुतियां दीं जाएंगी।

     संलग्न - भजन कार्यक्रम में उपस्थित कलाकारों  की फ़ोटो यहां पर संलग्न हैं।

शिवानंद द्विवेदी, संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत 7869992139

Rewa, MP - पावनस्थली कैथा में महाशिवरात्रि महोत्सव समापन की ओर - 13 फरवरी महाशिवरात्रि को होगा हवन एवं विशाल भंडारा

दिनाँक 12 फरवरी 2018, स्थान - श्री हनुमान मंदिर प्रांगण कैथा से, गढ़/गंगेव रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

    कैथा की पावन भूमि पर दिनाँक 31 जनवरी से प्रारंभ हुआ महाशिवरात्रि महोत्सव 13 फरवरी को विसर्जित हो जाएगा। 

      यह विशेष आयोजन श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण कैथा में हो रहा है जिसके संरक्षक एवं अध्यक्ष कलयुग के देवता पवन पुत्र बजरंगबली जी हैं। यह सभी कार्यक्रम सार्वजनिक रूप के होते हैं जो जन सहयोग से श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत के तत्वावधान में सम्पन्न होते हैं

       कार्यक्रम के विशेष सहयोगियों में श्री भैयालाल द्विवेदी, सिद्धमुनि द्विवेदी, संतोष केवट, महेंद्र त्रिपाठी, जय प्रकाश त्रिपाठी, नंदलाल केवट, संपूर्णानंद द्विवेदी, देवराज जायसवाल, कमलेश पांडेय, निरीक्षक बुद्धसेन पटेल, मतिगेंद पटेल, बृजभान केवट, रामबहोर केवट, विशेषर केवट, गोकुल केवट, बंसपती साकेत, विहारी एवं छोटा साकेत, अरुणेंद्र पटेल, राजबहोर एवं राम नरेश पटेल, संपत्ति एवं लालबहादुर पटेल, शिवशंकर शुक्ला सहित अन्य भक्त गण सहयोगी रहे।

     दिनाँक 13 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन हवन एवं भंडारे का कार्यक्रम  है जिसमे सभी भक्त श्रद्धालुगणों को सादर आमंत्रित किया जाता है।

   संलग्न - कार्यक्रम स्थल श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण कैथा की कुछ तस्वीरें।

 - शिवानंद द्विवेदी संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत। 

         7869992139

Saturday, 10 February 2018

Rewa, MP - कैथा में शिवमहापुराण महायज्ञ का नौवां दिन - उमा संहिता का चल रहा वर्णन, "शिव और शक्ति एक दूसरे के पूरक हैं, शिव-शक्ति की अभिन्नता का यथार्थ है भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप"

दिनांक 11 फरवरी 2018, स्थान - श्री हनुमान मंदिर, पावन यज्ञस्थली कैथा से, गढ़/गंगेव रीवा मप्र

   (शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

  पावन यज्ञस्थली कैथा में चल रहे शिव महापुराण कथा के नौवें दिन उमा संहिता का वर्णन चल रहा है जिसके अंतर्गत नरक के विभिन्न स्वरूपों का निरूपण, शक्ति के विभिन्न अवतारों का वर्णन, दान और तप के प्रभाव से नरक के प्रभाव का कम होना, जम्बूदीप का निर्धारण सहित छः द्वीपो का निरूपण, मृत्यु ज्ञान का वर्णन, ब्रह्मांड के वर्णन में पाताल का निरूपण, योगियों की शक्ति से काल प्रभाव निवारण, चौदह मन्वंतर का वर्णन, राजा सुरथ की कथा, देवी का अवतरण, महालक्ष्मी, महाकाली, सरस्वती, एवं महा दुर्गा शक्ति का अवतरण और शुम्भ निशुम्भ, मधु कैटभ, रक्तबीज आदि असुरों का देवी द्वारा संहार आदि कथा प्रसंग निरंतर चल रहे हैं।

      शिवमहापुराण महायज्ञ के अगले कथा प्रसंगों में कैलाश संहिता और वायवीय संहिता का वर्णन किया जाएगा।

  "शिव और शक्ति एक दूसरे के पूरक हैं, शिव-शक्ति की अभिन्नता का यथार्थ है भगवान शिव का अर्धनारीश्वर स्वरूप"

    शिव और शक्ति एक दूसरे से अभिन्न हैं।

शास्त्रों में बताया गया है कि शिव साकार एवं निराकार दोनो स्वरूपों में विद्यमान हैं परंतु यह दोनों स्वरूप अभिन्न हैं। जब ब्रह्मांड अव्यक्त रूप में होता है तब शिव निराकार स्वरूप में विद्यमान रहते हैं। शिव लिंग का कुछ अण्डाकार स्वरूप भी इसी शिव के निराकार स्वरूप को दर्शाता है। लिंग का तात्पर्य प्रतीकात्मक चिन्ह से होता है। शिव लिंग की मानव लिंग से तुलना करने के सभी कथानक व्यर्थ हैं और बहुत गलत भ्रामक अवधारणा है। यह गलत अवधारणा हिन्दू धर्म को कुंठित कर नुकसान पहुचने वाले तत्वों द्वारा किया गया है।

     जब सृस्टि का सृजन होता है तो शिव को स्वयं में निहित शक्ति का प्रादुर्भाव करना पड़ता है। कहते हैं कि शक्ति के बिना शिव शव जैसे हैं, तात्पर्य यह है कि किसी प्रकार के सृजन के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है। जब शिव में शक्ति का प्रादुर्भाव होता है तब शिव- शक्ति की पूर्णता से सृस्टि का प्रादुर्भाव, संचालन एवं अंततः पुनः प्रलय होता है।

     यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे" अर्थात जो इस पिण्ड रूपी शरीर मे है वही इस ब्रह्मांड में है -

    शास्त्रों में कहा गया है  'एक एवं तदा रुद्रो न द्वितीयो असनि कश्चन' अर्थात सृष्टि के प्रारंभ में एक ही रुद्र विद्यमान रहते हैं दूसरा कोई नही होता। रुद्र रूपी परम शिव ही तीनो रूपों में विद्यमान हैं और इस जगत की सृष्टि, पालन और अधर्म अत्याचार बढ़ने पर प्रलय करते हैं।

"रु" का अर्थ दुःख से है और "द्र" का तात्पर्य द्रवित करना अथवा हटाने से है। अर्थात रुद्र का तात्पर्य है दुःख को हरने या हटाने वाला। शिव सर्वव्यापक सर्वात्मा, सर्वज्ञ एवं सम्पूर्ण ब्रह्मांड का आधार हैं। 

  "अहं शिवः शिवश्चर्य, त्वं छापी शिव एवं हि।

सर्व शिवमयं ब्रह्म शिवत्त्परं न किंचन।।"

        अर्थात मैं शिव, तू शिव, यह जगत शिव, यह ब्रह्मांड शिव, शिव से परे कुछ भी नही इसीलिए कहा गया है - 'शिवोदाता, शिवोभोक्ता, शिवं सर्वमिदं जगत। शिव ही दाता हैं, शिव ही भोक्ता हैं, जो दिखाई पड़ रहा है यह सब शिव ही है, शिव का अर्थ है जिसे सब चाहते हैं। सभी अखंड आनंद, अखंड कल्याण, और अखंड मंगल चाहते हैं और वह सब शिव तत्व में ही निहित हूं अतः शिव की भक्ति में रत होते हुए सम्पूर्ण जीवन शिवमय कर देना और सर्व कल्याण जगत कल्याण के भाव से कर्म करते हुए शिव अर्थात परम ब्रह्म को समर्पित कर देना ही मॉनव का उद्देश्य होना चाहिए।

       !!!!बम बम भोले, हर हर महादेव!!!!

संलग्न - श्रीशिवमहापुरण महायज्ञ कथा श्रवण उपस्थित शिव भक्त श्रद्धालु गण।

    - शिवानंद द्विवेदी, संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत।

     7869992139

Rewa, MP - यज्ञस्थली कैथा में श्रीशिवमहापुरण का आठवां दिन - कोटिरुद्र संहिता का चल रहा वर्णन - "आत्मा त्वं गिरिजा मतिः अर्थात जीव में अविनाशी आत्मा रूपी कल्याणकारी शिव व्याप्त हैं, और गिरिजा अर्थात शक्ति रूपी मति या बुद्धिरूप में हैं"

दिनांक 10 फरवरी, स्थान - पावन यज्ञस्थली कैथा श्री हनुमान मंदिर प्रांगण से, गढ़/गंगेव, रीवा मप्र।

 (शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

          पावन यज्ञस्थली कैथा में दिनांक 31 जनवरी से प्रारंभ हुआ महाशिवरात्रि महोत्सव अपने समापन की कगार पर बढ़ रहा है। शिवमहापुराण प्रवचन के आठवें दिवश आचार्य श्री चंद्रमणि पयासी जी महाराज ने कोटिरुद्र संहिता का वर्णन किया, जिसमे द्वादश ज्योतिर्लिंगों का वर्णन, काशी में स्थित शिवमूर्तियों का महात्म्य, अत्रिकेश्वर लिंग का महात्म्य, सती अनुसुइया के तप से प्रसन्न गंगा का उसके गृह में निवास, गोकर्ण क्षेत्र में महाबल नामक शिव लिंग का वर्णन, एक चाण्डालिनी द्वारा विल्बपत्र फेंकने मात्र से और उस बेलपत्र के शिवलिंग में गिरने से उस चाण्डालिनी का परमपद प्राप्त होना और उसके उद्धार की कथा, गोकर्ण क्षेत्र में सहमित्र नामक राजा के स्नान करने से उसकी मुक्ति, चन्द्रभाल एवं पशुपति आदि शिवलिंगों का वर्णन, अंधकेश्वर महात्म्य प्रसंग में बटुक उत्पत्ति, रोहिणी में अधिक प्रेम होने के कारण दक्ष का चंद्रमा को श्राप और छयरोग निवारण हेतु सोमेश्वर लिंग स्थापन, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारेश्वर, भीमेश्वर का महात्म्य वर्णन, काशी विश्वनाथ में स्थित विश्वेशर शिवलिंग की महिमा का वर्णन, आठवें ज्योतिर्लिंग त्रयंबकेश्वर के महात्म्य वर्णन में गौतम जी का प्रभाव वर्णन, गौतम ऋषि पर गोहत्या का मिथ्या कलंक लगाया जाना और उसकी निवृत्ति के लिए पार्थिवेश्वर पूजन और श्राप से निवृत्ति, शिव का गौतम पर अनुग्रह और गंगा तथा त्रयंबकेश्वर का वहां पर निवास, नौवें ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथेश्वर का महात्म्य, दारूकावन में राक्षसों का उपद्रव और दशवें ज्योतिर्लिंग नागेश्वर का महात्म्य वर्णन, भगवान श्रीराम के अवतार और रावण वध हेतु रामेश्वर शिवलिंग का स्थापन एवं महात्म्य वर्णन, घुश्मा के मृत हुए  पुत्रों को जीवित करने से घुश्मेश्वर नामक ज्योतिर्लिंग की प्रशिद्धि और उसके महात्म्य का वर्णन, विष्णु का शिव से सुदर्शन चक्र की प्राप्ति, शिवरात्रि का महात्म्य वर्णन, शिव सहस्रनाम स्त्रोत और महात्म्य का वर्णन आदि कथा प्रसंगों का सतत प्रवचन चल रहा है।

      पावन यज्ञस्थली कैथा के अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में श्री शिव महापुराण कथा का श्रवण पान करने के लिए सभी भक्त श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है।

    कार्यक्रम का समापन हवन एवं भंडारे के साथ महाशिवरात्रि के दिन 13 फरवरी को होगा।

   संलग्न - शिव महापुराण महायज्ञ में उपस्थित भक्त श्रधालु गण।

  -शिवानंद द्विवेदी, संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत। 7869992139

Friday, 9 February 2018

Rewa, MP - पावन यज्ञस्थली कैथा में शिवमहापुराण महायज्ञ का सातवां दिन - सतरुद्र संहिता के कथा प्रसंगों का चल रहा वर्णन

दिनाँक 9 फरवरी 2018, स्थान - पावन यज्ञस्थली कैथा से, गढ़/गंगेव रीवा मप्र।

 (शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

   पावन यज्ञस्थली कैथा के अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में दिनांक 31 जनवरी से प्रारम्भ हुआ महाशिवरात्रि महोत्सव दिनांक 9 फरवरी को भी निरंतर चल रहा है। इस बीच आचार्य श्री चंद्रमणि पयासी जी महाराज ने शिव लीला के विभिन्न कथा प्रसंगों पर प्रकाश डाला।

      श्रीशिवमहापुरण अंतर्गत विध्येश्वर और रुद्र संहिता के कथा प्रसंगों के बाद शतरुद्र संहिता पर प्रवचन चल रहा है जिसमे शौनक मुनि द्वारा सूतजी से सद्योजात वामदेव आदि के अवतारों की कथा सुनने की जिज्ञासा होना, अर्धनारीश्वर की उत्पत्ति और भवानी का दक्ष के घर मे जन्म, पहले द्वापर युग मे श्वेत मुनि के रूप में शिव का अवतार और उनके शिष्यों के वर्णन, दसवें द्वापर से अट्ठाइस द्वापर तक शिवजी के विभिन्न अवतारों का वर्णन, शिलादिमुनि द्वारा शिव की घोर तपश्या और नंदी का उनके पुत्र रूप में जन्म और शिव द्वारा नंदी कद विवाह उपरांत गणपत्य पद प्रदान करना, दधीचि के तप से प्रसन्न होकर शिव द्वारा वारदान और पिप्पलाद मुनि के रूप में शिव का अवतार, महानंदा वेश्या के तप से प्रसन्न होकर शिव का वैश्यनाथ के रूप में अवतार, कालभैरव द्वारा ब्रह्मा का अभिमान नष्ट करना, वीरभद्र द्वारा नृसिंह का अभिमान नष्ट करना आदि पौराणिक कथा प्रसंगों का वर्णन चल रहा है। 

    लोककल्याण के निमित्त  विषपान करने के कारण शिव कहलाये नीलकंठ भगवान - 

    शिव त्याग और कल्याण का दूसरा नाम है। 

     पौराणिक कथा प्रसंगों के अनुसार समुद्र मंथन में 14 रत्न प्राप्त हुए, तेरह रत्नों को तो देव और असुरों ने आपस मद बांट लिया लेकिन मंथन से प्राप्त हलाहल विष के कारण सम्पूर्ण सृष्टि विनाश के कगार पर खड़ी थी तब ब्रह्मा विष्णु को इस सृस्टि को चलाने का संकट उत्पन्न हो जाता है ऐसे में अब प्रश्न था कि इस हलाहल को कौन धारण कर सकता था। ऐसे में सभी देवता असुर गण भागकर शिव के समक्ष उपस्थित हुए और शिव ने जब देखा कि अभी तो सृस्टि का प्रारंभिक चरण है और यदि प्रारम्भ में ही इसका नास हो गया तो पुनः संकट उत्पन्न होगा ऐसे में शिवजी ने जगत कल्याण के लिए हलाहल विष को स्वयं ही धारण कर लिया। तभी से शिवजी का नाम भी नीलकंठ पड़ा क्योंकि भयंकर विष को गले मे धारण करने के बाद शिवजी का कंठ नीला पड़ गया था।

     हलाहल विष का जिस प्रकार भगवान शिव ने लोक कल्याण के लिए विषपान कर लिया उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को सदैव परहित का भाव रखना चाहिए और स्वयं की शुख सुविधा कामनाओं का त्याग कर भीषण से भीषण कष्ट सहते हुए जन कल्याण के भाव से मानवता की रक्षा से कार्य करना चाहिए।

      पापविनाशक मोक्षप्रदायक श्री शिव महापुरण कथा का श्रवण पान करने के लिए सभी भक्त श्रधालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है। महायज्ञ का समापन हवन एवं विशाल भंडारे के साथ दिनांक 13 फरवरी महाशिवरात्रि के दिन किया जाएगा।

संलग्न - सातवें दिन श्रीशिवमहापुरण कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें।

  - शिवानंद द्विवेदी, संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत।

    7869992139

Wednesday, 7 February 2018

Rewa, MP - कैथा में श्रीशिवमहापुरण महायज्ञ का छठा दिन - क्या कर्म से पलायन कर मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है?

दिनाँक 8 फरवरी 2018, स्थान - पावन यज्ञस्थली कैथा से, गढ़/गंगेव, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

           यज्ञस्थली कैथा में चल रहे श्रीशिवमहापुरण कथा में दिनाँक 8 फरवरी को रुद्र संहिता के युद्ध खंड की कथा प्रसंग की चर्चना हो रही है। इस बीच आचार्य श्री चंद्रमणि पयासी जी महाराज के मुखारबिंद से पापविनाशक कथा में बताया गया कि शिव स्वयंभू देवाधिदेव हैं। धर्म सत्य और तप की शक्ति सिद्ध करने के लिए भववान शिव को विभिन्न प्रकार से लीलाएं करनी पड़ती हैं। ईश्वर को कुछ करने की आवश्यकता नही है सब कुछ उसकी इक्षा मात्र से ही होता है, ईश्वर सभी मनुष्यों को उनके कर्मों के आधार पर फल देने वाला होता है। शास्त्रों में बताया गया है कि ईश्वर कर्म के आधार पर सृष्टि सृजन करते हैं और कर्म के आधार पर ही मोक्ष अथवा संसार चक्र में फसे रहने का निर्धारण होता है। ईश्वर सभी जीवों के प्रति समान है परंतु मानव को जो भी शुभ अशुभ फल भोगने पड़ते हैं वह उसके शुभ अशुभ कर्म के आधार पर निर्धारित होते हैं। इसलिए व्यक्ति को चाहिए कि बुरे कर्म का त्याग कर वह सात्विक कर्म में रत हो ताकि जन्म जन्मांतर से संचित हुए बुरे प्रारब्ध कर्मों से निवृत्ति मिले और जीवन के वास्तविक उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति हो सके।

   क्या कर्म से पलायन कर मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है?- 

      इस पर शास्त्र कहते हैं कि मोक्ष प्राप्ति के दो मार्ग हैं एक प्रवृति एवं दूसरा निवृति मार्ग। जहां प्रवृत्ति मार्ग का तात्पर्य शुभ और सात्विक कर्मों को करते हुए उसे ईश्वर को समर्पित करते हुए अपने इष्ट की आराधना में लगे रहना वहीं निवृत्ति मार्ग का तात्पर्य संन्यास मार्ग से है अर्थात सर्वस्व त्याग कर मन क्रम और वचन पूर्वक इष्ट की आराधना करना जिसमे न तो कोई सांसारिक वस्तुओं की प्राप्ति की अभिलाषा शेष हो और न ही किसी सांसारिक वस्तु के खो जाने का दुख। शुख दुख, लाभ हानि, जय पराजय, मान अपमान, राग द्वेष सभी से परे जाकर सन्यासी की भांति जीवन यापन करने वाला ही निवृत्ति मार्गी कहलाता है। प्रवृति और निवृत्ति दोनो मार्गों से मुक्ति सम्भव है इस प्रकार शास्त्रों का कथन है।

   शिवमहापुराण कथा में रुद्र संहिता का वर्णन और अंधक, शंखचूर्ण तुलसी आदि के कथा एवं युध्य खण्ड प्रसंग -

    शिवमहापुराण कथा के रुद्र संहिता में युद्ध खण्ड की कथा प्रसंगों में दंभासुर का तप और संखचूर्ण नामक पुत्र की प्राप्ति, शंखचूर्ण तुलसी विवाह, शंखचूर्ण का वध और तुलसी द्वारा विष्णु को पथ्थर होने का श्राप, हिरण्याक्ष एवं हिरण्यकश्यप का वध, अंधक का पार्वती के पसीने से उतपत्ति, अंधक का देवताओं को परास्त करना, अंधक का वध, आदि कथा प्रसंग चल रहे हैं।

       यह विशेष आयोजन महाशिवरात्रि की पावन बेला में अति प्राचीन श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण कैथा में हो रहा है जिसके संरक्षक कलयुग के देवता पवनपुत्र श्री बजरंग बली जी हैं। कार्यक्रम का समापन 13 फरवरी महाशिवरात्रि के दिन हवन एवं विशाल भंडारे के साथ किया जाएगा।

      महाशिवरात्रि महोत्सव में प्रतिदिन शायं 7 बजे से मध्यरात्रि तक भजन रामायण का कार्यक्रम रखा जाता है। श्री हनुमान मंदिर प्रांगण के सभी आयोजन सार्वजनिक रूप के होते हैं जिसमे सभी श्रद्धालुजनों एवं भक्तों को सादर आमंत्रित किया गया है।

  संलग्न - श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजन संबधी कथा प्रवचन एवं भजन कार्यक्रम में उपस्थित भक्त श्रद्धालुओँ  के छायाचित्र।

   - शिवानंद द्विवेदी, संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत।

     7869992139


Rewa, MP - पवित्र स्थली कैथा में महाशिवरात्रि महोत्सव में संध्या भजन में प्रतिदिन हो रही कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति

दिनांक 7 फरवरी 2018, स्थान - पावन यज्ञस्थली कैथा से, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र) 

         पवित्र यज्ञस्थली कैथा स्थित अति प्राचीन श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण में महाशिवरात्रि महोत्सव अंतर्गत प्रत्येक शाम आयोजित हो रहे संध्या भजन की कड़ी में दिनांक 6 फरवरी की शाम स्थानीय कलाकारों द्वारा सुंदर भजन की प्रस्तुति दी गई।

      मदरी से पधारे अम्बिका पटेल द्वारा शानदार मनमोहक भजनो की प्रस्तुति दी गई।

अम्बिका ने कई भजनों की प्रस्तुतियां दीं जिसमे "तेरे बगैर श्याम भक्तों का हाल क्या होगा" सहित कुछ होली गीत भी प्रस्तुत कीं. हिनौती के राघवेंद्र चौबे एवं शिवसागर द्विवेदी ने भी रामायण की सुंदर प्रस्तुति दीं।

            इसके पूर्व पनगड़ी लोटनी निवासी आत्मानंद पांडेय एवम अगडाल भूतपूर्व सरपंच कुंजमणि तिवारी, प्रकाश नारायण परौहा द्वारा भी सुंदर प्रस्तुतियां दीं गयी थी। 

          इसी श्रृंखला में दिनाँक 7 फरवरी को करहिया, कैथा और हिनौती के कलाकारों द्वारा भजन प्रस्तुतियां दी जाएंगी। इस बीच सभी भक्त श्रोतागणों को सादर आमंत्रित किया गया है।

   संलग्न - दिनाँक 6 फरवरी की शाम भजन संध्या में उपस्थित कलाकार और श्रोता गण।

  - शिवानंद द्विवेदी, प्रचारक एवं सयोजक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत। 7869992139

Rewa, MP - कैथा में शिवमहापुराण महायज्ञ का पांचवां दिन - कुमारखंड एवं युद्ध खंड का चल रहा वर्णन, तारकासुर एवं त्रिपुरासुर का वध, असुर जालंधर का वर्णन

दिनाँक 7 फरवरी 2018, स्थान - पावन यज्ञस्थली कैथा से, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप)

     दिनाँक 31 जनवरी से प्रारंभ हुआ महाशिवरात्रि महोत्सव यज्ञों की पावन स्थली कैथा के श्री हनुमान मंदिर कैथा में निरंतर चल रहा है। इस बीच श्रीशिवमहापुरण कथा के पांचवें दिन कुमारखंड एवं युध्य खण्ड का वर्णन हुआ। आचार्य श्री चंद्रमणि प्रसाद पयासी जी ने कथा के अगले चरण में शिव पार्वती का विवाह, कार्तिकेय का सरखंडों के बीच मे जन्म, तारकासुर, त्रिपुरासुर का राक्षसी उत्पात, इन्द्रादि देवों का भयाक्रांत होकर पलायन करना, कुमार द्वारा तारकासुर का वध, शिवजी तीनों पुरों सहित त्रिपुरासुर को भस्म करना और इसीलिए शिवजी का नाम त्रिपुरारी पड़ना, पार्वती द्वारा गणेश जी का निर्माण कर अपनी सुरक्षा में नियुक्त करना, शिवगणों का गणेश के साथ युद्ध, शिवगणों का परास्त होकर शिव को सूचित करना, शिव द्वारा त्रिशूल से गणेश का सिर काटना, पार्वती जी का कुपित होना, गणेश के हांथी का सिर लगाना, शिव की नेत्राग्नि से जालंधर नामक असुर की उत्पत्ति, जालंधर की पत्नी का विष्णु द्वारा पतिव्रत भंग करना जिससे जालंधर को परास्त किया जा सके, विष्णु को श्राप, जालंधर से भीषण युध्य आदि कथा प्रसंग चल रहे हैं।

   सर्वं खल्विदं ब्रह्म अर्थात सभी जड़ चेतन ईश्वर से ही आच्छादित है - 

        ब्रह्म सत्यम जगत मिथ्या अर्थात मात्र ब्रह्म ही सत्य है और जगत माया का खेल मात्र है   का उद्घोष आचार्य आदि शंकर ने अपने अद्वैत वेदांत में किया। भीषण रण क्षेत्र में जब अर्जुन अपने स्वजनों को देख मोहित हुए तब उनको गीता का ज्ञान देते हुए श्रीकृष्ण ने यह अर्जुन को महाभारत काल मे ही स्पष्ट कर दिया कि हे अर्जुन यह जो भी दृश्य जगत है यह होते हुये भी नही है। क्योंकि यह जगत परिवर्तनशील है और जो हर क्षण बदलने वाला हो वह मात्र माया का खेल ही हो सकता है वह सत्य कदापि नही हो सकता क्योंकि सत्य अपरिवर्तनीय है। आगे श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता के विभूतियोग में बताया कि इस चराचर स्थावर जंगम जगत में सब कुछ ईश्वर के ऊपर ही टिका है और सभी मे मैं अर्थात ईश्वर ही विद्यमान है और इसी से स्पष्ट हो जाता है कि क्योंकि सभी मे एक वही परमात्मा है अतः यह सम्पूर्ण ब्रह्मांड अद्वैत ही है। अब इस अद्वैत को कैसे अनुभव किया जाय यह तब तक संभव न होगा जब तक हमारे ज्ञान चक्षु न खुलेंगे।

      इस प्रकार आदि आचार्य शंकर ने जो अद्वैत वेदांत की महिमा का गुणगान अपने ग्रंथों में किया है वह भारतीय संस्कृति के मूल में है क्योंकि भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम, अहिंसा, एकोब्रह्मद्वितीयोनास्ति, सर्वे भवन्तु शुखिनः की जो बात निरंतर करती आई है वह अद्वैत वेदांत से ही प्रेरित है जिसमे किसी भी जीव मात्र की बिना कारण हत्या करना हिंसा करना अपने आप अर्थात ईश्वर को कष्ट देने जैसा है।

    कैथा की पावन भूमि पर चल रहे श्री शिवमहापुराण कथा का श्रवनपान करने के लिए आप सभी को सादर आमंत्रित किया जाता है। भंडारा एवं हवन का कार्यक्रम महाशिवरात्रि 13 फरवरी को रखा गया है।

संलग्न - श्रीशिवमहापुरण कथा स्थल की फ़ोटो एवं उपस्थित भक्त श्रद्धालुजनों के छयाचित्र।

  - शिवानंद द्विवेदी, संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत।

     7869992139

Tuesday, 6 February 2018

Rewa, MP कैथा में श्रीशिवमहापुरण कथा का चौथा दिन - रुद्र संहिता के सतीखण्ड, पर्वतीखण्ड का चल रहा वर्णन (शिव का अर्थ है जगत कल्याण कारक)

दिनाँक 6 फरवरी 2018, स्थान - श्री हनुमान मंदिर प्रांगण कैथा, गढ़/गंगेव रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

    कैथा की पावन भूमि पर आयोजित हो रही शिवमहापुराण की कथा में दिनाँक 6 फरवरी को रुद्र संहिता का सती एवं पर्वतीखण्ड का प्रसंग चल रहा है। 

    इस बीच कथा में सती का अपने पिता दक्ष के यज्ञ में बिना आमंत्रण के रुद्ररहित यज्ञ का आरंभ एवं सती का दक्ष के प्रति कोप एवं ज्वालामुखी की उत्पत्ति,  सती के 12 मास तक शिवव्रत आचरण और उसके बाद ब्रह्मा एवं विष्णु द्वारा कैलाश पहुचकर शिवजी की स्तुति करना, ब्रह्मा एवं विष्णु की स्तुति के उपरांत शिवजी द्वारा जगत कल्याण की दृष्टि से सती से विवाह करना स्वीकार करना, दक्षयज्ञ में सती का अपमान एवं सती का देह त्याग, पुनः सती का अवतरण एवं हिमालय कन्या के रूप में जन्म, तारकासुर नामक असुर की उत्पत्ति एवं असुर द्वारा उत्पात, देवताओं द्वारा ब्रह्मा की स्तुति करना एवं ब्रह्मा द्वारा इस निमित्त शिव पार्वती के विवाह उपरांत पुत्र द्वारा तारकासुर वध का प्रसंग, इंद्र द्वारा कामदेव रति को शिव की समाधि भंग करने वास्ते भेजना, शिव द्वारा कामदेव रति को भष्म कर देना फिर ब्रह्मा इन्द्रादि देवताओं की प्रार्थना पर पुनः जीवन देना और शिव का अंतर्ध्यान होना, पार्वती को नारद द्वारा शिव पंचाक्षर मन्त्र का उपदेश, पार्वती द्वारा शिव की घोर तपश्या आदि कथा प्रसंगों का सुंदर वर्णन चल रहा है।

 शिव हैं अजन्मा अविनाशी, महायोगी, त्यागमूर्ति महादेव - 

      ईश्वर अजन्मा, अविनाशी, सर्वज्ञ, सर्वव्यापी, त्रिकालदर्शी, त्रिगुणात्मक प्रकृति के परे एवं अवस्थातीत है। उसी ईश्वर के अनन्त रूपों एवं नामो में शिव एक नाम हैं। परमेश्वर के शिवरूप की आराधना उपासना करने से हमारे अंदर शिव के ही गुण आते हैं। शिव का संस्कृति में अर्थ होता है कल्याणकारी अर्थात लोक कल्याणकारी शिव अर्थात न तो उनका जन्म होता और न ही विनाश इसीलिए यह अविनाशी और अजन्मा हैं। शिव त्रिगुणात्मक प्रकृति सतोगुण, रजोगुण एवं तमोगुण से परे हैं। सती प्रसंग के उपरांत शिव समाधिस्थ हो गए तब सम्पूर्ण ब्रह्मांड में त्राहि त्राहि मच गई। अंधकार, असत्य, असुर प्रकृति का आधिक्य होने पर शिव ही हैं जो इन सबका संहार कर सतोगुण की स्थापना करते हैं और जैसे ही शिव समाधिस्थ हुए वैसे ही असुर प्रवित्तियाँ फैल गईं ऐसे में सभी देवी देवता मॉनव गंधर्व इन असुर शक्तियों से आतंकित हुए। ऐसे में ब्रह्मा और विष्णु इन्द्रादि देवताओं के लिए सृस्टि चलाने का संकट उत्पन्न हो जाता है और फिर विधि के विधान और सृष्टि चलाने वास्ते शिव की समाधि खोलने के तौर तरीके अपनाए जाते हैं।

   पावन स्थली कैथा के श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।

    संलग्न - श्रीशिवमहापुरण कथा में उपस्थित श्रोतागण और कार्यक्रम की फ़ोटो।

  - शिवानंद द्विवेदी, संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत

    7869992139

Rewa, MP - श्री हनुमान मंदिर कैथा में महाशिवरात्रि महोत्सव 2018 अंतर्गत प्रतिदिन आयोजित हो रहा भजन संध्या का कार्यक्रम (देखें संलग्न फ़ोटो)

दिनांक 6 फरवरी 2018, स्थान - श्री हनुमान मंदिर प्रांगण कैथा, रीवा मप्र।

   (शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

 पावन यज्ञस्थली कैथा के अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में दिनांक 31 जनवरी से 13 फरवरी तक आयोजित किये गए महाशिवरात्रि महोत्सव 2018 में शिवमहापुराण कथा प्रवचन के उपरांत प्रतिदिन शाम 7 बजे से प्रारम्भ होकर मध्यरात्रि तक भजन संध्या का कार्यक्रम रखा जाता है जिसमे क्षेत्र के कलाकार उपस्थित होकर भजन रामायण की प्रस्तुति देते हैं। 

     इस श्रृंखला में पिछले दिनों भूतपूर्व अगडाल सरपंच  कुंजमणि तिवारी, प्रकाश नारायण परौहा, पनगड़ी के आत्मानंद पांडेय, कैथा से सिद्धमुनि द्विवेदी, करहिया से त्रिवेणी प्रसाद लोनिया, दिनेश लोनिया आदि के द्वारा सुंदर मनोहारी भजन एवं श्रीरामायण की प्रस्तुति दी गई।

      दिनांक 5 फरवरी शाम को आत्मानंद पांडेय द्वारा "कट जाए जिह्वा पापिनी हरि नाम के बिना" एवं "यही नाम हरदम हो मुख में हमारे, हरे कृष्ण गोविंद मोहन मुरारे" आदि सुंदर मनोहारी भजनों की प्रस्तुति से पूरे श्रोतागण भाव विभोर हो गए।

     कार्यक्रम में प्रतिदिन दिनाँक 13 फरवरी तक निरंतर श्रीशिवमहापुरण कथा के साथ साथ भजन संध्या का कार्यक्रम चलता रहेगा। 

      श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में सभी भक्तों श्रद्धालुओँ को सादर आमंत्रित किया जाता है।

    संलग्न - कार्यक्रम प्रस्तुति की कुछ छायाचित्र।

  - शिवानंद द्विवेदी, संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत।

     7869992139

Monday, 5 February 2018

Rewa, MP - कैथा में श्री शिवमहापुराण महायज्ञ का तीसरा दिन, रुद्र संहिता का सृष्टि खण्ड की कथा

दिनांक 5 फरवरी 2018, स्थान - पावन यज्ञस्थली कैथा, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

दिनाँक 2 फरवरी से प्रारम्भ हुआ श्री शिवमहापुराण भक्ति ज्ञान महायज्ञ की अमृतमयी एवं मोक्षप्रदायक कथा प्रसंग आचार्य श्री चंद्रमणि प्रसाद पयासी जी के मुखारबिंद से अविरल दिनांक 5 फरवरी को भी प्रवाहित हो रही है। यह कार्यक्रम सतत 13 फरवरी तक चलेगा।

   आगे शिवमहापुराण की कथा में रुद्र संहिता के कथा प्रसंगों का वर्णन चल रहा है जिसमे भगवान शिव की पूजा अर्चना और लिंग पूजन और उसके प्रकार का वर्णन चल रहा है। नारद का मोहग्रस्त होना, भगवान विष्णु को श्राप, भगवान शिव द्वारा ब्रह्मा एवं केतकी को झूंठ बोलने के कारण श्राप देना, विष्णु जी का वाराह रूप धारण, कैलास एवं बैकुंठ धाम की उत्पत्ति, रुद्रगण सृष्टि का वर्णन, शिव और सती के विवाह का वर्णन, आदि महत्वपूर्ण कथा प्रसंगों की चर्चना हुई।

     विश्वकर्मा द्वारा शिव लिंग के निर्माण का वर्णन हुआ जिसमें बताया गया कि कुबेर को स्वर्ण लिंग, मानवों को पार्थिव लिंग, और अन्य देवताओं को विभिन्न धातुओं के लिंग के बंटवारे की कथा प्रसंग भी आया है.

   लिंग का अर्थ और भाव -

      शास्त्रों में लिंग के कई अर्थ बताए गए हैं। जिनमे मुख्य अर्थ भगवान शिव के निराकार स्वरूप का वर्णन है। जिस प्रकार श्रष्टि के प्रारम्भ में सबकुछ निराकार था उसी भगवान सदाशिव के निराकार स्वरूप को लिंग अर्थात प्रतीक के रूप में व्यक्त किया जाता है। लिंग की पूजा का तात्पर्य ही है कि हम प्रभु के निराकार स्वरूप की आराधना करते हैं जो घट घट के वासी हैं, जड़ चेतन में व्याप्त हैं, सम्पूर्ण ब्रह्मांड के अधिष्ठाता है, भूत वर्तमान और भविष्य के ज्ञाता हैं, कण कण में विद्यमान हैं, सर्वज्ञ हैं, सर्वव्यापी हैं।

     शिव कथा में आगे आता है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश उन्ही सदाशिव के सृजनात्मक, पालक, एवं संहारक साकार स्वरूप हैं। 

      बता दें कि श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण कैथा में दिनांक 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चल रहे महाशिवरात्रि महोत्सव 2018 की श्रृंखला में शिवमहापुराण भक्ति ज्ञान महायज्ञ का आयोजन हो रहा है जिसमे सम्पूर्ण महायज्ञ का विसर्जन महाशिवरात्रि के दिन 13 फरवरी को किया जाएगा।

     कैथा की पावन स्थली में अमृतमयी, पापविनाशक, मोक्षप्रदायक श्री शिव कथा का श्रवनपान करने के लिए सभी भक्त श्रद्धालुओँ को सादर आमंत्रित किया जाता है।

संलग्न - कार्यक्रम के तीसरे दिन कथास्थल के कुछ फोटोग्राफ।

  - शिवानंद द्विवेदी संयोजक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत।

    7869992139

Sunday, 4 February 2018

Rewa, MP - कैथा में श्रीशिवमहापुराण महायज्ञ का दूसरा दिन - चंचुला नामक कुमार्गगामी स्त्री और उसके पति के मोक्ष की कथा

दिनाँक 4 फरवरी, स्थान - पावन यज्ञस्थली कैथा से, रीवा मप्र।

(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)

   दिनाँक 3 फरवरी को श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण कैथा में शिवमहापुराण महायज्ञ की बैठकी के उपरांत दिनाँक 4 फरवरी को शिवमहापुराण के कथा प्रसंग में आगे शिवमहापुराण के महात्म्य का सुंदर वर्णन चल रहा है। 

     आचार्य श्री चंद्रमणि प्रसाद पयासी के मुखारबिंद से अविरल प्रवाहित हो रहे शिवमहापुराण कथा में बताया गया कि सनातन वैदिक हिन्दू धर्म मे मोक्ष के कई मार्ग बताए गए हैं। सनातन धर्म की विशेषताओं का वर्णन करते हुए बताया गया कि इस धर्म मे ईश्वर के विभिन्न स्वरूपों में किसी भी एक स्वरूप की विशेष निष्ठा समर्पण के साथ उपासना करने से मॉनव मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।

     जहां भागवत शास्त्र में वैष्णव पंथ में भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों की चर्चना और उनकी उपासना की विधि का वर्णन मिलता है वहीं शिवमहापुराण कथा में भगवान शिव की विभिन्न लीलाओं का सुंदर वर्णन किया गया है। शैव मत में विशेष श्रद्धा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए शिवमहापुराण कथा का प्रतिदिन श्रवण पाठन करने की बात कही गयी है। इसी प्रकार माता शक्ति में विशेष श्रद्धा आस्था रखने वाले उपासकों के लिए शाक्त परंपरा अनुसार देवी भागवत पुराण के पठन और श्रवण से पुण्य लाभ मिलकर मोक्ष प्राप्ति के मार्ग का वर्णन है

 कथा में द्वितीय दिवश हुआ महात्म्य का वर्णन, विंधेश्वर संहिता का चल रहा वर्णन - 

      शिव कथा के दूसरे दिन कथा महात्म्य का वर्णन किया गया। बताया गया कि गंगा नदी के तट पर व्यास जी के शिष्य सूत जी ने कलयुग आगमन का वर्णन किया और वर्णाश्रम भेद का वर्णन करते हुए बताया कि सभी वर्णों के किस प्रकार से कार्य होंगे।

     इसी बीच अध्याय 4 में चंचुला एवं विंदुग नामक ब्राह्मण दाम्पत्य का वर्णन करते हुए आचार्यश्री ने बताया कि चंचुला जैसी अत्यंत पतित एवं कुमार्गगामी स्त्री भी शिव सरनागति से पाप मुक्त हो ईश्वर को प्राप्त किया। चंचुला अपने कुमार्गगामी स्वभाव के कारण पतित हो चुकी थी जिसके मन मे प्रारब्धवश प्रायश्चित भाव उत्पन्न होता है और कुछ श्रेष्ठ ब्राह्मण उसको भगवान शिव की उपासना की महिमा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि हे ब्राह्मण पत्नी तुम भगवान शिव और माता शक्ति की उपासना करो वही तुम्हारा उद्धार करेंगे। भगवान शिव अत्यंत दयालु  हैं और जो उनकी शरणागति सच्चे मन से प्राप्त करता है उसके लिए प्रभु अत्यंत कल्याणकारी हैं। वैसे शिव का अर्थ ही होता है कल्याण करने वाला। 

  अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण कैथा में अविरल प्रवाहित हो रही पाप विनाशक कथा का श्रवण पान करने के लिए सभी श्रद्धालुओँ को सादर आमंत्रित किया जाता है। महायज्ञ का समापन हवन एवं विशाल भंडारे के साथ महाशिवरात्रि के दिन 13 फरवरी को किया जाएगा।

 संलग्न - कार्यक्रम के दूसरे दिवश शिवमहापुराण कथा में उपस्थित भक्त श्रद्धालुओँ का दृश्य।

  - शिवानंद दद्विवेदी, संयोजक एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत,

7869992139