Sunday, 27 February 2022

MP//Rewa// लोक सूचना अधिकारियों को जुर्माने से बचने के क्या उपाय करने चाहिए विषय पर आयोजित हुआ 88 वां राष्ट्रीय आरटीआई वेबीनार//

 दिनांक 27 फरवरी 2022 रीवा मध्य प्रदेश।

शासकीय कार्यालयों में लोक सूचना अधिकारी समय पर कैसे जवाब देकर उनके विरुद्ध सूचना आयोग के द्वारा धारा 20(1) एवं 20(2) के तहत की जाने वाली जुर्माने एवं अनुशासनात्मक कार्यवाही से बच सकते हैं इस विषय पर 88 वें राष्ट्रीय आरटीआई वेबीनार का आयोजन किया गया। 

   कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने की जबकि कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती, मध्यप्रदेश के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप और पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेष गांधी सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिभागियों ने अपने प्रश्न पूछे और सुझाव भी दिए। प्रमुख रूप से कार्यक्रम में जुड़ने वाले लोगों में छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल, जोधपुर राजस्थान से सुरेंद्र जैन और नरेंद्र सिंह राजपुरोहित, ताराचंद जांगिड़, मप्र से पत्रकार प्रीतम सिंह पटेल, नई दिल्ली से अक्षय गोस्वामी, आगरा उत्तर प्रदेश से नरोत्तम शर्मा, उत्तर प्रदेश से मेघराज सिंह आदि एक्टिविस्ट सम्मिलित हुए और अपने सुझाव रखे और प्रश्न भी पूछे। 

   कार्यक्रम का संचालन आर टी आई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के द्वारा किया गया जबकि कार्यक्रम सहयोगियों में रीवा मध्य प्रदेश से पत्रिका समूह के वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह, हाई कोर्ट जबलपुर के अधिवक्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट नित्यानंद मिश्रा सम्मिलित हुए।

 लोक सूचना अधिकारियों ने भी रखे अपने प्रश्न, मिला मार्गदर्शन

   कार्यक्रम में मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश से कुछ लोक सूचना अधिकारी भी सम्मिलित हुए जिनमें रीवा मध्य प्रदेश से कमिश्नर कार्यालय में कार्यरत सहायक लोक सूचना अधिकारी कृष्णानंद पांडेय, जिला पंचायत रीवा में कार्यरत लोक सूचना अधिकारी विनायक पांडेय एवं चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय से लोक सूचना अधिकारी सम्मिलित हुए। लोक सूचना अधिकारियों ने बताया कि वह धारा 6(3) के अंतरण में दिक्कत महसूस करते हैं तो क्या इस स्थिति में आवेदन लेने से मना किया जा सकता है, जबकि आवेदन उनके कार्यालय से संबंधित न हो तो क्या करें। इसके विषय में उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती ने बताया कि कोई भी आवेदन जब किसी कार्यालय में आरटीआई की धारा 6(1) के तहत दिया जाता है उस स्थिति में मात्र लिखित तौर पर ही आवेदन वापस किया जा सकता है और सीधे वहां पर आवेदन वापस करना गैरकानूनी कहलाता है। कार्यक्रम में सम्मिलित विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती एवं आत्मदीप ने धारा 6(1), 6(3) एवं धारा 7 के तहत लोक सूचना अधिकारियों के कर्तव्यों और दायित्वों के विषय में विस्तार से चर्चा की और बताया कि समय सीमा 30 दिन के भीतर आरटीआई आवेदनों का समाधान कर दिया जाना चाहिए। 

    उन्होंने बताया कि यदि जानकारी कार्यालय में है तो जानकारी उपलब्ध करवा दी जाए और यदि जानकारी उस कार्यालय से संबंधित नहीं है तो उस स्थिति में धारा 6(3) के तहत अन्य कार्यालय को अंतरित किया जाना चाहिए। 

  इस प्रकार अन्य कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम सुबह 11:00 से दोपहर 1:00 के स्थान पर पूरा दोपहर 2:00 तक चला जिसमें देश के विभिन्न कोनों से जुड़े हुए सैकड़ों प्रतिभागियों ने कई सवाल किए जिसका उपस्थित विशेषज्ञों ने जवाब दिया। 

संलग्न - संलग्न कार्यक्रम की तस्वीरें देखने का कष्ट करें।


शिवानंद द्विवेदी सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता जिला रीवा मध्य प्रदेश मोबाइल नंबर 9589152587


Thursday, 14 October 2021

भारत में गोवंशों की दुर्दशा और वर्तमान स्वार्थी समाज // क्या हिन्दू बाहुल्य समाज धर्मग्रंथों की नैतिकता भूल चुका? क्या अब पेटपूजा और व्यक्तिगत स्वार्थ ही होगा सर्वोपरि? क्यों हिन्दू अभी भी मृतकों को तारने के लिए करते हैं गोदान? ढोंग और वास्तविकता में अंतर को रेखांकित करता शिवानंद द्विवेदी का यह लेख

 

दिनांक 14 अक्टूबर 2021 रीवा मप्र.

 


 

   आज वर्तमान भारतीय हिन्दू समाज एक विचित्र दौर से गुजर रहा है जहां वर्तमान भौतिक शुख सुविधाओं युक्त जिन्दगी की भागदौड़ जहां मात्र शारीरिक सुख और विलासितापूर्ण जीवन ही समृद्धि की परिभाषा में आता है इसकी लालसा हर एक नागरिक को है. जहाँ तक हिन्दुओं से इतर समाज की बात करें तो यह सार्वभौमिक सत्य है की गोवंशों को मात्र कई अन्य समाज में उपभोग और भोज्य सामग्री के तौर पर ही माना जाता है. विश्व में एक मात्र हिन्दू समाज ही ऐसा समाज है जहाँ पर गाय की धर्मशास्त्रों में बड़ी महिमा बताई गयी है. श्रीमद भागवत और श्री कृष्ण लीला में तो हिन्दुओं के अवतारी भगवान् श्रीकृष्ण को गायों की सेवा करते और उन्हें चराते हुए दिखाया गया है. गायों के लिए बड़े बड़े राक्षसों से युध्य करते हुए दिखाया गया है. आखिर इन धर्म शास्त्रों का क्या औचित्य है और क्या जो बातें पुराणों में बताई गई है वह वर्तमान समाज में कितना चरितार्थ हो पा रही है आइये इस पर एक नजर डालेंगे?

 

  

धर्म से इतर यदि बात की जाए तो भारत जैसे कृषि प्रधान देश में पारंपरिक कृषि खेती बाड़ी में पशुओं के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. हालाँकि न केवल भारत अथवा हिन्दू समाज में बल्कि सभी धर्मों और सभी समाज में जब कृषि यंत्रों का आविष्कार नहीं हुआ था तो पशुओं पर निर्भरता सर्वाधिक थी. इसका प्रमाण तो इतिहास में भली भांति प्राप्त किया जा सकता है. लेकिन समय के साथ सब कुछ बदल जाया करता है. यहाँ तक की एक कहावत है की स्टेटस के साथ सम्बन्ध और उंच-नीच के व्यवहार भी समय के साथ बदल जाया करते हैं. यद्यपि नैतिकता शब्द ऐसा है जिसके अंदर हर प्रकार के भौतिक बदलाव के बाद भी सम्बन्ध और मानवीय पहलू नहीं बदलते. पर सवाल यह है की इस नैतिकता की आज के वर्तमान समय में कोई कीमत बची है की नही? क्या इस नैतिकता को कोई जानने, मानने और समझने वाला है?

 

 

   जरूरत गयी बात गयी और कीमत गयी


     इसी सिद्धांत पर आज का वर्तमान समाज काम कर रहा है. बहुत से लोग तो बड़े गर्व के साथ कहते हैं की भोजन की परिभाषा में सब जीव आ जाते हैं इसलिए यदि अन्न खा सकते हैं तो पशुओं को क्यों नहीं? ऐसे बहुतायत लोग इतने प्रचंड तर्क देते हैं की नैतिकता को मानने वाले भी कई बार अपना सिर शर्म से झुका लेते हैं नहीं शायद अमुक व्यक्ति ठीक कह रहा है और शायद हमी गलत थे जो अब तक शाकाहारी भोजन करते थे और पशुओं को सम्मान देते थे. शायद यह तो खाने पीने वाली सामग्री ही हों? आज हमारे चारों तरफ एक विचित्र आवरण बनता जा रहा है जहाँ सही और नैतिकता की बातें करने वाला वेवकूफ और अनपढ़ लकीर का फ़कीर कहलाता है जबकि बड़े तामझाम प्रदर्शन करने वाला और अनैतिक व्यवहार करने वाला पढ़ा लिखा एडवांस्ड और बड़ा कहा जाता है. ऐसे में जाहिर है नैतिकता वाला व्यक्ति अपना मुह कहीं छुपाकर बैठा रहता है और चाहते हुए भी कुछ नहीं कर पाता. एक कहावत भी है की यदि गलत को एक हज़ार व्यक्ति मिलकर बोलें की यही सही है तो शायद वह सही हो जाता है. और वास्तव में देखा जाय तो आज के समय में यही चल रहा है. आज भीड़ तंत्र का जमाना है. भीड़ जो कहे वही सही बांकी सब नैतिकता भरी बातें गलत हैं.

 


 

क्यों प्रताड़ित है हमारी गोमाता?

 

   आइए चलते हैं धार्मिक ग्रंथावली की तरफ. यदि रामायण और महाभारत और अन्य महापुराण ग्रन्थों को उठाया जाय तो उसमे एक बात बार बार उल्लेखित मिलती है. वह है की कलयुग का जब समय आयेगा तो गो और ब्रह्मण की बड़ी दुर्दशा होगी. यहाँ पर यह उल्लेखनीय है की ब्रह्मण वह है जो ब्रह्म अर्थात ईश्वर को मानने वाला है जो आस्तिक है जो ईश्वर की बात करता है जो नैतिकता की बात करता है वह ब्राह्मण है. यहाँ ब्राह्मण का जाति से कोई मतलब नहीं है. और सही में यदि देखा जाय तो यह बात अब अक्षरसः सही भी हो रही है. आज इश्वर की बात करने वाला, आस्तिकता की बात करने वाला, गाय की बात करने वाला, पशुओं की बात करने वाला मूर्ख अनपढ़ और लकीर का फ़कीर कहा जा रहा है. जो नैतिकता की बात करता है उसको निचले बुद्धि का माना जाता है. जो गाय की बात करता है उसे भी यही कहा जाता है. आज जहाँ बड़े बड़े जज साहब और बड़े बड़े कथित बुद्धिजीवी अपने आपको बड़े शौक और गर्व के साथ नास्तिक कहते हैं की हम बीफ ईटर हैं. कहते हैं हमें गर्व है की हम बीफ खाते हैं. अब ऐसे में वह लोग हैरान रह जाते हैं जो यह मानते थे की मांस खाना हिंसा कहलाता है. और जहां तक गाय का सवाल है तो भारतीय हिन्दू समाज के लिए इसका एक बड़ा महत्व है जिसका उल्लेख ऊपर किया जा चुका है.



 

 

क्या भारतीय समाज दुविधा में है? गोमांस का भक्षण करे कि नहीं?

 

   आज जब हम गोवंशों की दुर्दशा देखते हैं तो बड़ी पीड़ा होती है क्या समय आ गया है. क्या यह वही भारतीय समाज है जिसमे कभी गाय को माता बनाकर पूजा जाता था और यदि ढोंग के तौर पर बातें करें तो अभी भी कागजों फोटो किसी के मरने पर वैतरणी के नाम पर और गोदान के नाम पर खूब ढोंग किया जा रहा है. अभी हाल ही में रीवा मप्र के जिस टेहरा-लालगांव ग्राम से सैकड़ों गोवंशों को रेहवा घाटी में धकेलने के लिए ले जाया गया था उसी ग्राम में एक व्यक्ति के मरने पर कर्मशाला बनाई जा रही थी और अगले दिन मृत्यु कर्म किया गया जिसमे एक गाय को पूंछ से पकड़कर कुछ वही हिन्दू समाज के लोग काफी ढोंग कर रहे थे जिनके ग्राम से यही रेहवा घाटी की गोहत्या की वारदात की गयी थी. है ना हैरानी वाली बात?

 

नैतिकता को मानें कि आवश्यकता अनुरूप जीवन यापन को?

 

  उक्त सभी बातों को देखा जाय तो एक प्रश्न उठता है की मानव नैतिकता को मान रहा है की आवश्यकता को? जब तक बैलों की कृषि के लिए आवश्यकता थी तब तक गाय माता और बैल को भाई की संज्ञा दे दी गयी थी. हिन्दू समाज में तो बकायदे हरछठ में हल और बैलों की भी पूजा आज भी होती है. लेकिन यदि जीवित बैल को भोजन देने की बात आ जाए तो हमारा समाज यह स्वीकार नहीं कर सकता. ऐसा इसलिए की यह मानव बड़ा ही स्वार्थी है. अपने स्वार्थ के आगे यह सब नैतिकता भूल जाता है. धर्म-कर्म और नैतिकता की परिभाषा भी मानव आवश्यकता और समय के अनुसार यह स्वार्थी प्राणी बना-बिगाड़ लेता है. भला अब कहाँ बैल और हल की आवश्यकता रह गयी है. भला अब कहाँ कंडे और गोबर की जरूरत है. अब तो उज्जवला योजना का घर घर कनेक्शन है. अब तो सभी कृषि उपकरण जो सरकारें अब आसानी से सब्सिडी में दे रही है. दूध के लिए डेयरी खुल गयी है जो घर में दूधवाला मशीन से दुहा और इंजेक्शन सीमन से तैयार गाय का दूध उपलब्ध करा दे रहे हैं और बैलों बछड़ों को सीधे कटने के लिए भेज दे रहे हैं. घर का लड़का तो नौकरी करता ही है शहर में. वहां से मोटी रकम आ जाती और उससे सब कुछ खरीदा जा सकता है. सब कुछ? जी हाँ सब कुछ. नैतिकता अनैतिकता सब कुछ. इसलिए आज मानव को जिसकी आवश्यकता है वह आसानी से मिल रहा है इसमें नैतिकता कहाँ से आ गयी.

 

कलयुग के अगले चरण में मानव मानव को खायेगा?

 

  चलिए यहाँ तक तो बात समझ आ रही है की अपने स्वार्थ और आवश्यकता के लिए मानव गोवंश हो अथवा नैतिकता सब की बलि चढ़ा सकता है पर क्या एक और भी बात इसी दौर में देखने को मिलेगी? शास्त्रों में एक बात और भी आती है. कहा गया है कि आने वाले सबसे बुरे दौर में मानव मानव की मांस भी खायेगा? हालांकि कभी कभी कैनिबाल की कहानियां सुनने को मिलती है कि यह वह जीव होता है जो हम मानव ही होते हैं लेकिन यह जीवित मानव की गोस्त को खा जाते थे. हमने अपनी आँखों से तो अभी तक ऐसा नहीं देखा पर कहानियों में सुना है. कुछ समय पूर्व चाइना जैसे देशों से एक न्यूज़ हवा में उड़कर आ रही थी की वहां गर्भवती महिलाएं अपने 3 से 4 माह तक के फ़ीटस को बेंच लेती हैं और वह कुछ विशेष प्रकार की ताकत की दवा बनाने में काम आता है जिसे कुछ कथित लोग उपयोग करते हैं. ऐसी सूचनाएं इन्टरनेट आदि माध्यमों से समय समय पर मिलती रहती हैं की ह्यूमन गोस्त का रैकेट भी पकड़े गए थे. जहाँ तक मेडिकल साइंस का सवाल है तो वहां पर भी समय-समय पर इस प्रकार की ख़बरें सुनने में आती रहती हैं की ऐसे एक्सपेरिमेंट भी होने की संभावना बनी रहती है.

 

भारतीय समाज को गाय माता नहीं एक बोझ है

 

 

  जिस प्रकार की पशु क्रूरता की वारदातें पिछले कुछ वर्षों से निरंतर बढ़ी हैं उसमे यह तो स्पष्ट है की वह परम्परागत ग्रामीण और हिन्दू समाज जो गाय को माता मानने का बोझ ढोए जा रहा था वह अब गाय को माता मानने की इच्छा बिलकुल नहीं रखता. खैर कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो अपनी माता को भी माता मानने को तैयार नहीं हैं. क्यों की वृद्ध और अनुपयोगी माता पिता जिस प्रकार वृद्धाश्रम की शोभा बढ़ा रहे हैं उससे साफ़ स्पष्ट है समाज मात्र स्वार्थ के लिए सम्बन्ध बनाता है न की नैतिकता के लिए. सुर नर मुनि सब की यह रीति स्वारथ लागि करहिं सब प्रीती- यह चौपाई तुलसीदास ने अपने रामचरित मानस नमक ग्रन्थ में लिखा है जो अब अक्षरसः सत्य है.

 

  

   यह बात भी सही है कि हालांकि मानव का नैतिक पतन तो निरंतर हो रहा है लेकिन अभी तक इतना नहीं हुआ है की भारतीय हिन्दू समाज गोवंशों को चावल दाल मानकर उनको अपना भोज्य बना ले. शायद इसलिए अभी वह उन्हें समाज से बहिष्कृत कर रहा है. शायद आने वाले समय में यह भोज्य भी बन जाएँ लेकिन अभी पहले चरण में है जहां अभी गोवंशों को समाज से बहिष्कृत कर रहा है इसीलिए पहले उन्हें घर से खदेड़ कर अवैध बाड़ों में डाल दे रहा है, नहरों, घाटियों, खाइयों, जलप्रपातों में धकेल दे रहा है- चलो भाग जाओ, मर जाओ यहाँ मत दिखना अब क्योंकि हम तुम्हे खा नहीं रहे हैं यह तुम्हारी गनीमत समझो, अब यहाँ से भाग जाओ हमारी दृष्टि से ओझल हो जाओ, दिखना बिलकुल नहीं, तुम मवेशी अब हमारे किसी काम के नहीं बचे, दूध हमे दूधवाले से मिल जाता है तुम्हारी जरुरत नहीं. मेरे जी का जंजाल मत बनो, हमारी फसलों को मत खाओ, हमारे खेतों के नजदीक मत आना. भाग जाओ अब हमें सरकार ने गैस दे दिया है तुम्हारे गोबर कंडे की भी हमे जरुरत नहीं. हमे बैल की कोई जरूरत नहीं देख नहीं रहे हमारे पास ट्रैक्टर और थ्रेसर हैं? हम सब काम मशीनों से कर लेंगे चले जाओ यहां से हमें तुम्हारी कोई जरूरत नहीं, रुक जाओ तुमने हमारी फसल खाई है न अब लो हम तुम्हारा मुह तार से बांध दिए दे रहे हैं तब न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी..... ब्लाह ब्लाह.... इस प्रकार के मानव के विचार रहते हैं जब वह इन बेजुबानो को घर से खदेड़ कर इनके साथ विभिन प्रकार से क्रूरता करता है.

 

 

समाधान मात्र एक – नैतिकता नहीं बल्कि स्वार्थ की पूर्ति

 

 

   अब जब इस वर्तमान समय में नैतिकता को बाय बाय हो चुका है तो जरूरत को हाइ हाइ होगा. ऐसे में अब समाज का वह वर्ग जो अपने आप को नैतिक भी मानता और मजबूत भी की वह इस बुरे दौर में स्थाई तौर पर अंगद की तरह पैर जमाये खड़ा रहे और उसका भी दायित्व बनता है की चाहे उसे अपनी कुर्बानी ही क्यों देनी पड़े लेकिन वह वह सब रास्ते इजाद करे जिससे गोवंशों को इस स्वार्थी समाज में उपयोगी बनाया जा सके. इन्हें उपयोगी तो खैर समय भी बना देगा क्योंकि रासायनिक खादों से आने वाली बीमारियाँ जब इस मानव के अस्तित्व के लिए चुनौती बन जाएँगी तो गोबर कंडों और जैविकता की तरह लौटना ही पडेगा लेकिन वह भी एक मज़बूरी ही होगी या यूँ कहें की वह भी उस आने वाले समय की जरुरत ही होगी तब देखेंगे की नई इबारतें लिखीं जाएँगी नए सिद्धांत आ जायेंगे क्योंकि सब सिद्धांत और इबारतें तो आवश्यकता और जरुरत के हिसाब से ही बनती बिगडती हैं. इसलिए यदि हम कुछ पशु प्रेमी या गोवंश प्रेमी चाहते हैं की गोवंश भी समाज में बने रहें और सम्मान के साथ बने रहें तो उन्हें उनका सम्मान दिलाने का तरीका अब नैतिकता का पाठ पढ़ाना बिलकुल नहीं रह गया बल्कि उन्हें इस अनैतिक और स्वार्थी समाज के लिए कैसे उपयोगी बनाया जाय इस पर विचार करना होगा और कार्य करना होगा.   

 


 

      संलग्न – लेखक की फोटो और कुछ फुटेज.

शिवानन्द द्विवेदी (सामाजिक कार्यकर्ता)  जिला रीवा मप्र. मोबाइल 9589152587

Friday, 19 October 2018

दुर्गोत्सव एवं दशहरे में विशाल भंडारे का आयोजन - श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण कैथा में 10 दिवशीय कार्यक्रम का हुआ आयोजन, भगत, भजन, रामायण एवं देवी पूजन के साथ भक्तिभाव के साथ सम्पन्न हुआ दुर्गोत्सव 2018

दिनांक 19 अक्टूबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा श्रीहनुमान मंदिर से, शिवानन्द द्विवेदी)

   परंपरागत रूप से प्रत्येक शारदीय नवरात्र के शुभवसर पर पावन पुनीत यज्ञस्थली कैथा श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में दशकों से आयोजित होने वाले दुर्गोत्सव 2018 का भक्तिभाव पूर्ण समापन होने की कगार पर है. दिनाँक 18 अक्टूबर को जहां कन्याभोज, हवन एवं सूक्ष्म भंडारे का आयोजन हुआ वहीं दिनाँक 19 अक्टूबर को दुर्गोत्सव के दशवें दिन दशहरे के दिन वृहद भंडारे का आयोजन किया गया. 

भंडारे का प्रसाद लेने दूरदराज से पधारे श्रद्धालुगण 

   इस बीच नवरात्र के अवसर पर दशहरे पर आयोजित भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने दूरदराज से भक्त श्रद्धालुगण पधारे जिंसमे सभी आयु वर्ग के लोग माताएं, बहनें, बच्चे, बालक, बालिकाएं सभी सम्मिलित हुए.

   भारतीय संस्कृति में किसी भी धार्मिक आयोजन में भंडारे का अपना एक विशेष महत्व होता है. अतः मान्यता अनुरूप सभी भक्त श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने आते हैं. 

सार्वजनिक सहयोग से होते हैं यह कार्यक्रम 

    यह सभी कार्यक्रम श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत के तत्वावधान में सार्वजनिक सहयोग से सम्पन्न कराए जाते हैं. जन जन के सहयोग से जो भी प्राप्त होता है वह माता श्री के चरणों में अर्पण कर दिया जाता है. आसपास के सैकड़ों ग्रामो से जुड़े हुए भक्त श्रद्धालुओं का यह मानना है की श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों में कलयुग के देवता पवनपुत्र श्री बजरंगबली जी की महती कृपा होती है. सभी कार्यक्रम श्रीहनुमान जी के संरक्षण में सम्पन्न होते आये हैं.

इन सहयोगियों का रहा विशेष योगदान

    वैसे तो कलयुग के अधिष्ठाता देवता श्रीहनुमान जी के मंदिर प्राँगण कैथा में आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों में सार्वजनिक रूप से सभी जन मानस का अपना अंश एवं सहयोग रहता है. जिसकी जितनी बनती है वह यथाशक्ति तन मन धन से अपना सहयोग करता है, फिर भी विशेष रूप से जिन सहयोगियों के प्रभु प्रेरणा से श्रीदुर्गोत्सव 2018 में बढ़चढ़कर भाग लिया और अपना हर संभव मनसा कर्मणा वाचा सहयोग दिया उनमे से कार्यक्रम के संयोजक अरुणेंद्र पटेल एवं नंदलाल केवट, पुरोहित आचार्य संपूर्णानंद द्विवेदी, पंडा आदित्य पटेल एवं महेश पटेल, सहयोगी राजेन्द्र तिवारी मदरी, यदुवंश मिश्रा, राजेन्द्र तिवारी गढ़, महेंद्र उर्मलिया, अच्चू द्विवेदी, छोटकउ पांडेय, देवराज जायसवाल, चंद्रमणि केवट, रामनरेश पटेल, हरिबंश पटेल, सिद्धमुनि द्विवेदी, भैयालाल पांडेय, विशेषर, रंगदेव, गोकुल, वृजभान, सतानंद, रज्जन, शिवा, रोहित, कैप्टेन, आशीष, उग्रभान आदि रहे.

टमस नदी में प्रवाहित होंगी माता की पार्थिव प्रतिमा

   श्री दुर्गोत्सव 2018 की समाप्ति पर मातारानी की पार्थिव प्रतिमा के विषर्जन हेतु टमस नदी ले जाकर प्रवाहित किया जाएगा एवं तदुपरांत गंगा मैया के स्वच्छ जल में भक्त जाकर स्नान करेंगे.

  2 बजे से आयोजित हुआ भंडारा

    श्रीदुर्गोत्सव 2018 का अंतिम भंडरा एवं प्रसाद वितरण 19 अक्टूबर 2018 को दोपहर बाद 2 बजे से प्रारम्भ किया जाकर भक्त श्रद्धालुगणों के अंतिम आगमन तक चलता रहा. इस बीच हज़ारों की संख्या में भक्त श्रद्धालुगण प्रसाद ग्रहण करने उपस्थित हुए. 

  अच्छाई की बुराई पर जीत का पर्व है दशहरा

    भारतीय संस्कृति में दशहरे का त्योहार प्राचीनकाल से चला आ रहा है. रामायण की परम्परा अनुसार जब भगवान श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त कर रावण जैसे घोर आसुरी शक्ति का अंत किये थे तब से दशहरे का पर्व सम्पूर्ण भारतीय समाज में हर्षोल्लाश के साथ मनाया जा रहा है. 


    दशहरा अच्छाई का बुराई पर जीत, सत्य की असत्य पर विजय और धर्म की अधर्म की विजय का प्रतीक है क्योंकि इसी अवसर पर भगवान श्रीराम रूपी धार्मिक और सत्यस्वरूप शक्ति अधर्म अनाचार, अत्याचार का प्रतीक बनी रावण-मेघनाद-कुम्भकर्ण रूपी आसुरी शक्ति पर विजय प्राप्त किये और तत्पश्चात यह पर्व मनाया जाने लगा.

    श्रीमद देवी भागवत की अन्य मान्यताओं के अनुसार ऐसा भी माना जाता है की देवी के 9 स्वरूपों द्वारा जब भीषण युद्ध के पश्चात महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ, मधु-कैटभ आदि आसुरी शक्तियों का अंत किया उसी के उपलक्ष्य पर भी दशहरे का पावन त्योहार मनाया जाता है. इसी प्रकार दशहरे के संदर्भ में अनेकानेक कथा प्रसंग विभिन्न भारतीय प्रथाओं एवं लोक परंपराओं के अनुरूप प्रचलित हैं जिनमे से सभी में एक ही बात आती है की दशहरे का पावन पर्व सत्य की असत्य पर धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है.

  दसहरे पर रावण कुम्भकर्ण एवं मेघनाद के पुतला दहन का होगा कार्यक्रम

    श्रीदुर्गोत्सव 2018 की समाप्ति पर दशहरे के दिन 19 अक्टूबर 2018 को रात्रि रावण कुम्भकर्ण एवं मेघनाद के पुतले दहन किया जाएगा. इस बीच हर वर्ग के लोगों में कार्यक्रम को लेकर काफी उत्साह का माहौल है.

   दशहरे का आध्यात्मिक तात्पर्य

    आध्यात्मिक दृष्टि से व्याख्यान करने वाले ज्ञानियों का कहना है की दशहरे का यदि संधि विक्षेद किया जाय तो इसके दश एवं हर शब्द आते हैं. दश का तात्पर्य हमारी दशों इंद्रियों से है जबकि हर शब्द भवन हरि विष्णु या हर शिव का नाम है. इस प्रकार जब नवरात्रि के 9 दिनों तक सतत आध्यात्मिक योग प्रक्रिया से गुजरकर मॉनव अपने मूलाधार चक्र से प्रारम्भ कर छह चक्रों का भेदन कर मस्तक में शहस्रार चक्र में पहुचता है तब वह सांसारिक माया से मुक्त होकर दशों इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर लेता है. इस प्रकार अपनी समस्त कामनाओं एवं दशों इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने वाला मानव योगी बन जाता है और योग की उस अवस्था में दशवें दिन अर्थात विजयादशमी के दिन वह हर या हरि को प्राप्त कर लेता है इस प्रकार दशहरे के दिन योगी समस्त इंद्रियों मनादि पर विजय प्राप्त कर जीवन्मुक्त हो जाता है.

संलग्न - संलग्न तस्वीरों में देखें विजयादशमी दशहरे के दिन आयोजित भंडारे के कार्यक्रम के दौरान उपस्थित भक्त श्रद्धालुगण.

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शिवानन्द द्विवेदी 

(सामाजिक कार्यकर्ता)

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 

9589152587, 7869992139

Thursday, 18 October 2018

कैथा में हवन एवं कन्याभोज का आयोजन - श्री दुर्गोत्सव 2018, पावन यज्ञस्थली कैथा श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण (रीवा मप्र)

दिनाँक 18 अक्टूबर 2018, स्थान गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी) 

   पावन यज्ञस्थली कैथा श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में दिनाँक 10 अक्टूबर से प्रारम्भ हुआ श्री दुर्गोत्सव 2018 अब अपने समापन की तरफ है जिंसमे नौ दिनों के कार्यक्रम के पश्चात हवन एवं कन्याभोज का आयोजन किया जा रहा है. 

   सामूहिक हवन प्रक्रिया में सभी ने लिया भाग

    इस बीच श्री दुर्गोत्सव में दिनाँक 18 अक्टूबर को हवन का आयोजन किया गया. हवन में भाग लेने के लिए बिना किसी जातिगत भेदभाव के आसपास के ग्राम क्षेत्रों कैथा, सोरहवा, बड़ोखर, मिसिरा, करहिया, हिनौती आदि ग्रामों के भक्त श्रद्धालुओं ने भाग लिया. विशेषकर युवा और बच्चों ने इस संस्कार में बढ़कर भाग लिया.

कन्याभोज का हुआ आयोजन

    नवमी के दिन कन्याभोज के भी आयोजन की परंपरा है अतः उसी के अनुरूप 12 वर्ष से नीचे की नौ कन्याओं को कन्याभोज कराया गया साथ ही उपस्थित अन्य सभी कन्याओं माताओं बहनों एवं भक्त श्रद्धालुओं को भी भोज कराया गया. ऐसी मान्यता है की दुर्गा के 9 रूपों के नाम पर नौ कन्याओं का विशेषतौर पर भोज कराया जाना समस्त दुख क्लेश आत्मिक, दैहिक एवं दैविक कष्टों को मिटाने वाला माना गया है और सभी प्रकार के फल देने वाला बताया गया है. परम्परानुरूप कन्याभोज कराने के बाद सभी कन्याओं को दान दक्षिणा दी जाती है और उन्हें विदा किया जाता है. मातृशक्ति को इतना सम्मान देने और उन्हें पूजने की परंपरा शायद किसी दूसरे धर्म सम्प्रदाय में नही है.

  दसहरे को होगा वृहद भंडारे का आयोजन 

    श्री दुर्गोत्सव का समापन वृहद भंडारे के साथ किया जाएगा जिंसमे दिनाँक 19 अक्टूबर 2018 को दसहरे के दिन उपस्थित समस्त भक्त श्रद्धालुओं को भंडारे का प्रसाद वितरण किया जाएगा. 

    भंडारा दोपहर बाद 2 बजे से प्रारम्भ होकर रात्रि तक भक्तों श्रद्धालुओं के आगमन तक चलता रहेगा.

    इसके पश्चात दिनांक 19 अक्टूबर को ही रात्रि कालीन समय में लगभग 11 बजे के बाद सम्पूर्ण पंडा एवं कमीटी के सदस्य मिलकर दुर्गाजी को लेकर टमस नदी में ले जाकर प्रवाहित कर विसर्जित करेंगे और इसके पश्चात जाकर गंगा नदी प्रयागराज में स्नान पूजा करेंगे. 

संलग्न - कार्यक्रम स्थल की फोटोग्राफ.

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शिवानन्द द्विवेदी

(संयोजक, प्रचारक, एवं प्रवक्ता श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति)

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

कैथा में दुर्गोत्सव 2018 का समापन हवन एवं भंडारे के साथ

दिनाँक 17 अक्टूबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र

(कैथा श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण से, शिवानन्द द्विवेदी)

   यज्ञों की पावन स्थली कैथा स्थित अति प्राचीन श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में परंपरागत रूप से प्रत्येक शारदीय नवरात्रि में आयोजित होने वाले श्री दुर्गोत्सव 2018 का समापन हवन एवं भंडारे के साथ किया जाएगा.

   कार्यक्रम में प्रतिदिन होते हैं देवी गीत  

   इस वर्ष नवमी तिथि को ही दसहरा भी मनाए जाने का प्रावधान है अतः इसी उपलक्ष्य पर हवन एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है. प्रातःकालीन संध्या के साथ ही प्रतिदिन देवी पूजा प्रारम्भ होती है जिंसमे आसपास के ग्राम क्षेत्रों कैथा, सोरहवा, मिसिरा, अकलसी, करहिया, डाढ़, हिनौती, बड़ोखर, बड़ियोर, भमरिया, हरिजन बस्ती, आदिवाशी बस्ती एवं अन्य भक्त श्रद्धालुगण उपस्थित होकर भगत, कीर्तन, देवी गीत गाते हैं. 

नवमी दशहरा को होगा हवन भंडारा 

   नवमी के दिन कन्याभोज एवं भंडारे का आयोजन किया जा रहा है. कन्याभोज एवं भंडारे के पूर्व वैदिक विधिविधान के साथ हवन का आयोजन होगा जिंसमे आसपास के सभी श्रद्धालुगण हवन में भाग लेते हैं. बताया गया है की वैदिक विधि विधान से कराए जाने वाले हवन का अपना एक वैज्ञानिक महत्व भी है. क्योंकि आज के वर्तमान विज्ञान में यह सिद्ध किया जा चुका है की विधि विधान से कराए जाने वाले हवन से आसपास का वातावरण स्वच्छ होता है एवं विभिन्न प्रकार के बीमारी और नकारात्मक ऊर्जा फैलाने वाले तत्त्वों का नाश होता है. शास्त्रों में ऐसा भी बताया जाता है की विधि विधान से कराए जाने वाले हवन जिंसमे की दर्ज़नों प्रकार की जड़ीबूटियां एवं सुगंधित द्रव्य भी सम्मिलित होते हैं जिससे पर्यावरण संतुलित होकर वर्षा भी होने में मदद होती है.

 सभी कार्यक्रम श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत के तत्वावधान में सम्पन्न होते हैं 

   श्री हनुमान मंदिर प्राँगण कैथा में आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर की एनजीओ श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति के तत्वावधान में सम्पन्न होते हैं जिसके संरक्षक कलयुग के देवता पवनपुत्र श्रीहनुमान जी हैं.

    आज से दशकों पूर्व श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत की आधरशिला प्रभुप्रेरणा से वरिष्ठ समाजसेवी एवं लोकहित चिंतक स्व. श्री बुद्धसेन द्विवेदी द्वारा रखी गई थी. 

कार्यक्रम में सहयोगी 

    वर्ष 2018 में शारदीय नवरात्रि में आयोजित श्री दुर्गोत्सव में जिन श्रद्धालुओं का सहयोग रहा उनमे से यदुवंश मिश्रा, राजेन्द्र तिवारी, अच्चू द्विवेदी, कैथा से संपूर्णानंद द्विवेदी, संतोष केवट, दिलीप केवट, शिवभाव केवट, विवेक मिश्रा, विशेषर केवट, रामानुज केवट, सतानंद केवट, बब्बू केवट, सिद्धमुनि द्विवेदी, उग्रभान केवट, भैयालाल पांडेय, सोरहवा से अरुणेंद्र पटेल, हरीबन्स पटेल, आदित्य शुभम पटेल, रामनरेश पटेल, विश्वनाथ पटेल, शंकर पटेल, रज्जन पटेल, देवराज जायसवाल, बड़ोखर से राजमणि पटेल, तेजई सिंह, लाला सिंह, दिव्ये सिंह, मुनेंद्र सिंह, करहिया से संजय लोनिया, काली लोनिया आदि हैं.

संलग्न -  संलग्न तस्वीरों में देखने का कष्ट करें श्री दुर्गोत्सव 2018 के दौरान कैथा श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में सजा माता का दरबार.

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शिवानन्द द्विवेदी

(संयोजक, प्रचारक, एवं प्रवक्ता)

श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत 

रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139

Wednesday, 10 October 2018

कैथा में नवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ, 10 दिनों तक चलेगा कार्यक्रम

दिनांक 10 अक्टूबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(रीवा, शिवानन्द द्विवेदी)

   पावन यज्ञस्थली कैथा श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण वर्षभर श्रद्धालुओं भक्तों के लिए आस्था का केन्द्रविन्दु बना रहता है. यहां पर विभिन धार्मिक उत्सवों में आयोजनों का सिलसिला पूरे वर्षभर चलता रहता है. सबसे विशेष बात यह है की कैथा की पवित्र एवं पुण्य भूमि पर होने वाले कार्यक्रम संभवतः प्रदेश एवं देश के किसी भी दूरदराज के ग्रामों में होने वाले आयोजनों में सर्वाधिक हैं. शायद ही पूरे प्रदेश में कोई कैथा जैसा दूरस्थ ग्राम हो जहां पूरे वर्षभर इतने अधिक आयोजन होते हों. आस्थावान भक्तों एवं श्रद्धालुओं का मानना है की यह सब कलयुग के देवता पवनपुत्र बजरंगबली की कृपा से संभव होता है. बता दें की यह सभी आयोजन मात्र आम जनमानस एवं सार्वजनिक सहयोग से सम्पन्न होते हैं. सबका मिलाजुला सहयोग ही इन कार्यक्रमों का आधार हैं. श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत नामक एक राष्ट्रीय स्तर की एनजीओ के तत्वाधान एवं श्रीहनुमान जी के संरक्षण में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में आम जनता ही सर्वोपरि सहयोगी है.

शारदीय नवरात्रि में सजा है माता का दरबार 

   कैथा श्रीहनुमान मंदिर में इस नवरात्रि 2018 में दिनांक 10 अक्टूबर से प्रारम्भ होकर निरंतर अगले 10 दिनों अर्थात दसहरा के पहले तक मातारानी का दरबार सजेगा. इस प्रकार प्रत्येक शाम के बाद भगत, रामायण, भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा जिंसमे स्थानीय एवं क्षेत्रीय कलाकार भाग लेंगे एवं साथ ही माताओं एवं बहनों द्वारा भी कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाएंगे. ग्राम क्षेत्र के आदिवाशी बंधुओं द्वारा शानदार भगत के कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये जाएंगे.

कार्यक्रम मे विशेष सहयोगी 

   इस बार के कार्यक्रम में जिन युवा एवं अन्य कार्यकर्ताओं का विशेष सहयोग रहेगा उनमे से शुभम आदित्य पटेल, नंदलाल केवट, महेश पटेल, संपूर्णानंद द्विवेदी, दिलीप केवट, प्रियांशु पटेल, सिद्धमुनि द्विवेदी, अरुणेंद्र पटेल, रामनरेश पटेल, विश्वनाथ पटेल, दसरथ केवट, रामानुज केवट, संतोष केवट, शिवशंकर शुक्ला, हरीबन्स पटेल, शैलेन्द्र पटेल, गोकुल केवट, रोहित मिश्रा, अशोक पांडेय, भैयालाल द्विवेदी आदि हैं.

इन कलाकारों की होंगी प्रस्तुतियां

  पूरे नौ दिन कार्यक्रमों के दौरान जिन कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी उनमे से मदरी से अम्बिका पटेल एवं नामदेव, कैथा से सिद्धमुनि द्विवेदी, बृजभान केवट, शिवमूर्ति केवट, करहिया से दिनेश लोनिया, जमुई-दुवागवां से धर्मराज, बड़ोखर से रंजीत साकेत, लोटनी से आत्मानंद पांडेय, पनगड़ी से बद्री पांडेय, टेहरा से आदित्यनाथ पांडेय, अगडाल से कुंजमणि तिवारी आदि सम्मिलित हैं.

हवन भंडारे के साथ होगा कार्यक्रम का समापन

  इस सम्पूर्ण कार्यक्रम का समापन हवन एवं विशाल भंडारे के साथ दसहरे के एक दिन पहले किया जाएगा. नौवीं के दिन कन्याभोज के साथ ही विशाल भंडारा का परंपरागत रूप से आयोजन होगा. जिंसमे सभी भक्तों एवं श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया गया है.

संलग्न - संलग्न तस्वीरों में कैथा की पवन भूमि श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में सजाया गया मातारानी जी का दरबार.

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शिवानन्द द्विवेदी

सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता

ज़िला रीवा मप्र, मोब 9589152587, 7869992139

Friday, 21 September 2018

श्रीहनुमान मंदिर कैथा में श्रीगणेशोत्सव के आयोजन का 9 वां दिवश ( ज़िला रीवा अन्तर्गत कैथा श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में दिनाँक 13 से 23 सितंबर 2018 तक आयोजित हो रहा गणेशोत्सव का कार्यक्रम, प्रतिदिन सायं 7 बजकर 30 मिनट से आयोजित होती है भजन संध्या)

दिनाँक 21 सितंबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा श्रीहनुमान मंदिर से, शिवानन्द द्विवेदी)

  यज्ञों की पावन स्थली कैथा श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में दिनाँक 13 सितंबर से प्रारम्भ हुआ श्रीगणेशोत्सव सतत चल रहा है जो 23 सितंबर तक चलता रहेगा. इस बीच कार्यक्रम में श्रीगणेश जी की स्थापना के साथ प्रतिदिन सायं 7 बजकर 30 मिनट से लेकर अर्धरात्रि तक भजन एवं रामायण का आयोजन किया जाता है. श्रीगणेश जी की पार्थिव प्रतिमा का विषर्जन 23 सितंबर को शुभ मुहूर्त में 2 बजे से 3 बजकर 30 मिनट के बीच किया जाएगा.

   स्थानीय कलाकारों की हो रही सुंदर भजन प्रस्तुतियां

   इस बीच दिन भर के कार्यक्रम के अतिरिक्त प्रत्येक सायंकाल में शाम साढ़े सात बजे से लेकर अर्धरात्रि तक भजन संध्या का कार्यक्रम आयोजित किया जाता रहा है. अब तक की प्रस्तुतियों में भठवा-मदरी  निवासी डॉक्टर अम्बिका, मदरी निवासी रामजी उपाध्याय, अगडाल से भूतपूर्व सरपंच रहे कुंजमणि तिवारी, कैथा से सिद्धमुनि द्विवेदी, करहिया से दिनेश लोनिया, टेहरा से प्रसिद्ध क्षेत्रीय गायक आदित्यनाथ पांडेय, जमुई से धर्मराज वर्मा, बड़ोखर से ढोलक में साथ देने के लिए रंजीत साकेत आदि कलाकारों ने श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में उपस्थित होकर बहुत ही मनमोहक प्रस्तुतियां दी हैं जिसने श्रोताओं को काफी आकर्षित किया है.

23 को सूक्ष्म भंडारे का होगा आयोजन 

  श्रीगणेशोत्सव का विषर्जन 23 सितंबर को सूक्ष्म भंडारे के साथ किया जाएगा जिंसमे पूड़ी सब्जी एवं मिष्ठान का प्रसाद वितरण उपस्थित भक्त श्रद्धालुओं को किया जाएगा. 

अगला आयोजन नवरात्रि में श्रीदुर्गा स्थापना 

   श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में निरंतर चलने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला में अगला विशेष आयोजन शारदीय नवरात्रि में श्रीदुर्गा जी की स्थापना है जिंसमे पूरे 9 दिवश तक माता का दरबार सजेगा एवं महिलाएं एवं भक्तगण पूरे 9 दिन कार्यक्रम में उपासना करते हुए भगत गाएंगे और भजन कीर्तन का आनंद लेंगे।

सालभर चलते हैं कार्यक्रम

   वैसे श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण कैथा में वर्ष भर आयोजन चलते रहते हैं जिंसमे मुख्यरूप से श्रावण मास में सप्ताहिक भागवत कथा अथवा श्रीरामकथा, महाशिवरात्रि के पावन पुनीत अवसर पर ग्यारह दिवशीय श्रीशिवमहापुरण कथा, गणेश चतुर्थी पर 11 दिवशीय श्रीगणेशोत्सव, शारदीय नवरात्रि ने शुभवसर पर 9 दिवशीय माता का दरबार, चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर देवी मंदिर कैथा में भागवत कथा, इसी प्रकार प्रत्येक महीने पूर्णिमा के शुभवसर पर 24 घंटे का अखंड मानस पाठ अथवा कीर्तन का कार्यक्रम. इस प्रकार श्रीहनुमान मंदिर कैथा रीवा ज़िला ही नही संभवतः पूरे प्रदेश का एकलौता ग्राम है जहां पर सार्वजनिक सहयोग से वर्ष भर इतने अधिक कार्यक्रम हो रहे हैं.

संलग्न -  कृपया संलग्न तस्वीर में देखने का कष्ट करें श्रीगणेशोत्सव कार्यक्रम की कुछ फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी, संयोजक, प्रचारक एवं प्रवक्ता,

श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत,

ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139