दिनांक 5 फरवरी 2018, स्थान - पावन यज्ञस्थली कैथा, रीवा मप्र।
(शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)
दिनाँक 2 फरवरी से प्रारम्भ हुआ श्री शिवमहापुराण भक्ति ज्ञान महायज्ञ की अमृतमयी एवं मोक्षप्रदायक कथा प्रसंग आचार्य श्री चंद्रमणि प्रसाद पयासी जी के मुखारबिंद से अविरल दिनांक 5 फरवरी को भी प्रवाहित हो रही है। यह कार्यक्रम सतत 13 फरवरी तक चलेगा।
आगे शिवमहापुराण की कथा में रुद्र संहिता के कथा प्रसंगों का वर्णन चल रहा है जिसमे भगवान शिव की पूजा अर्चना और लिंग पूजन और उसके प्रकार का वर्णन चल रहा है। नारद का मोहग्रस्त होना, भगवान विष्णु को श्राप, भगवान शिव द्वारा ब्रह्मा एवं केतकी को झूंठ बोलने के कारण श्राप देना, विष्णु जी का वाराह रूप धारण, कैलास एवं बैकुंठ धाम की उत्पत्ति, रुद्रगण सृष्टि का वर्णन, शिव और सती के विवाह का वर्णन, आदि महत्वपूर्ण कथा प्रसंगों की चर्चना हुई।
विश्वकर्मा द्वारा शिव लिंग के निर्माण का वर्णन हुआ जिसमें बताया गया कि कुबेर को स्वर्ण लिंग, मानवों को पार्थिव लिंग, और अन्य देवताओं को विभिन्न धातुओं के लिंग के बंटवारे की कथा प्रसंग भी आया है.
लिंग का अर्थ और भाव -
शास्त्रों में लिंग के कई अर्थ बताए गए हैं। जिनमे मुख्य अर्थ भगवान शिव के निराकार स्वरूप का वर्णन है। जिस प्रकार श्रष्टि के प्रारम्भ में सबकुछ निराकार था उसी भगवान सदाशिव के निराकार स्वरूप को लिंग अर्थात प्रतीक के रूप में व्यक्त किया जाता है। लिंग की पूजा का तात्पर्य ही है कि हम प्रभु के निराकार स्वरूप की आराधना करते हैं जो घट घट के वासी हैं, जड़ चेतन में व्याप्त हैं, सम्पूर्ण ब्रह्मांड के अधिष्ठाता है, भूत वर्तमान और भविष्य के ज्ञाता हैं, कण कण में विद्यमान हैं, सर्वज्ञ हैं, सर्वव्यापी हैं।
शिव कथा में आगे आता है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश उन्ही सदाशिव के सृजनात्मक, पालक, एवं संहारक साकार स्वरूप हैं।
बता दें कि श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण कैथा में दिनांक 31 जनवरी से 13 फरवरी तक चल रहे महाशिवरात्रि महोत्सव 2018 की श्रृंखला में शिवमहापुराण भक्ति ज्ञान महायज्ञ का आयोजन हो रहा है जिसमे सम्पूर्ण महायज्ञ का विसर्जन महाशिवरात्रि के दिन 13 फरवरी को किया जाएगा।
कैथा की पावन स्थली में अमृतमयी, पापविनाशक, मोक्षप्रदायक श्री शिव कथा का श्रवनपान करने के लिए सभी भक्त श्रद्धालुओँ को सादर आमंत्रित किया जाता है।
संलग्न - कार्यक्रम के तीसरे दिन कथास्थल के कुछ फोटोग्राफ।
- शिवानंद द्विवेदी संयोजक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत।
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