स्थान – कैथा, गढ़ (रीवा, म.प्र.), दिनांक: 09.08.2016
कैथा की पावन भूमि में कलश यात्रा के साथ
शुभारम्भ हुआ भागवत कथा का
विषय- यज्ञों की पावन स्थली कैथा के अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण
में कलश यात्रा के साथ श्रीमद भगवद भक्ति ज्ञान महायज्ञ का हुआ शुभारम्भ. नजदीकी
ग्राम क्षेत्र के नागरिक हुए शामिल.
(कैथा, रीवा) हिन्दू धर्म की कई मान्यताओं में से एक मान्यता
यह भी है की सौ महायज्ञ करने के बाद व्यक्ति अमरत्व को प्राप्त कर लेता है. श्रीमद
भगवद महापुराण में ही एक आख्यान ऐसा आता है जब दैत्यराज बलि अपने कुलगुरु श्री शुक्राचार्य
जी से सौवां महायज्ञ करवाने की तयारी में थे तभी भगवान विष्णु वामन का अवतार लेकर
बलि के महादानी होने की परीक्षा लेने के लिए आये. असुर गुरु शुक्राचार्य के बहुत
मना करने के बाद भी जब दैत्यराज बलि नहीं माने तब शुक्राचार्य जी क्रुद्ध होकर वहां
से चले गए और कह गए की राक्षसराज यह आपको सौ महायज्ञ रोककर देवताओं द्वारा परास्त
करने के उद्येश्य से ऐसा किया जा रहा है और तुम बलि अपने महादानी होने के घमंड में
इस बात को समझ नहीं पा रहे हो. क्योंकि यदि तुम सौ महायज्ञ कर लोगे तो अजेय हो
जाओगे और कोई भी नर, देवता, सुर, असुर इस सृष्टि में तुम्हे परास्त नहीं कर
पायेगा. परन्तु अपने वचन को देने के बाद असुरराज बलि अपनी बात से मुकरना नहीं
चाहते थे और इस प्रकार यह जानते हुए भी की वामन रूप में कोई और नहीं बल्कि नारायण
ही स्वयं अवतरित हुए हैं बलि ने वामन जी के द्वारा जो कुछ मागा गया उनको दे दिया.
इस प्रकार यह देखा जा
सकता है की किस तरह से यज्ञों की महत्वा को हमारे हिन्दू शास्त्र ग्रंथों में कई
स्थानों पर बखान किया गया है. भले ही आज कलयुग में कोई व्यक्ति सौ साल तक जीवित न
रहे अथवा अजेय/अमर न हो पाए परन्तु आज विज्ञान भी इस बात को भलीभांति मान रहा है
की हवन, यज्ञ, मंत्रोच्चारण आदि से हमारी मानशिक और अध्यात्मिक शक्तियों का समग्र
विकास होता है. धर्म और अध्यात्म मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति ज्यादा दृढ निश्चयी
और मनोबली होता है. जो बात आज हमारे अधीन नहीं है उसे हम ईश्वर पर छोंड देते हैं
इससे हम अपनी मर्यादायों में रहते हैं. पर जो व्यक्ति अपने गर्व और अहंकार में सब
कुछ अपने हाँथ में लेकर यह मानते हैं की ईश्वर का कोई अस्तित्व नहीं है और वही
(व्यक्ति) सब कुछ हैं और वही सब कुछ कर रहे हैं इससे हार एवं पराजय, दुःख-कष्ट की
स्थिति में ऐसे अहंकारी व्यक्ति जल्दी ही अपना आपा खो देते हैं और थक-हार जाते हैं
और यहाँ तक की आत्महत्या जैसे घृणित कार्य पर उतारू हो जाते हैं. ईश्वर द्वारा
प्रदत्त चौरासी लाख योनियों में से एक मानव जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण मोक्ष दायनी योनी
को नष्ट कर डालते हैं.
आज आवश्यकता है हमे अपने मूल स्वरुप को समझने की. जिस दिन व्यक्ति
सनातन धर्म के “एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति” से सिद्धांत को सही तरीके से समझ
जायेगा और अपने आपको उसी परम ब्रह्म परमेश्वर का अंश स्वरुप समझ पायेगा उस दिन
हमारी सीमायें समाप्त हो जाएँगी हम उस अनंत से एकाकार होने की दिशा में अपने आपको
बेहिचक बढ़ सकेंगे. हम अपने आपको घर, परिवार, जमीन जायदाद, सम्बन्ध, देश, राज्य और
मिटटी के टुकड़ों से नहीं जोड़ेंगे हम समझ पांएगे की हम वास्तव में जो वेदों में कहा
गया है “तत्वमसि” ही हैं.
कैथा में श्रीमद भागवत कथा कार्यक्रम का आगाज़ आज
कलश यात्रा के साथ – आज दिनांक 9
अगस्त दिन मंगलवार से कलश यात्रा के साथ कैथा की पावन भूमि पर स्वतंत्रता पूर्व से
चली आ रही श्रीमद भागवत का शुभारम्भ हुआ. कैथा और उसके आसपास के श्रद्धालु बड़ी
संख्या में उपस्थित होकर इस कार्क्रम में अपनी भागीदारी दिए.
कलश
यात्रा श्री हनुमान मंदिर प्रांगण से प्रारंभ होकर कैथा में ही स्थित अति प्राचीन श्रीमद
देवी जी के मंदिर तक गयी और तत्पश्चात देवी मा के मंदिर में दीप प्रज्वल्लित एवं
नारियल चढ़ाकर पुनः श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में वापिस हुई. इस दौरान बड़ी संख्या
में छोटे, बड़े, महिलायें और बुजुर्ग सम्मिल्लित हुए.
कल दिनांक 10 अगस्त दिन बुधवार को श्रीमद भगवद
कथा की बैठकी होगी. यह विशेष धार्मिक-अध्यात्मिक आयोजन दिनांक 16 अगस्त दिन
मंगलवार तक चलेगा एवं हवन तथा विशाल भंडारे के साथ सम्पूर्ण कार्यक्रम का समापन
होगा.
यज्ञों की पावन स्थली कैथा
के अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में दिनांक 9 अगस्त से 16 अगस्त तक
आयोजित होने वाली पापविनाशक अमृतमयी श्रीमद भगवद कथा का श्रवणपान करने के लिए आप
सभी सादर आमंत्रित हैं.
|||धन्यवाद|||
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Sincerely
SHIVANAND DWIVEDI
(Social, Scientific, and RTI
activist)
Village KAITHA, Post AMILIYA,
Police Station GARH, Tehsil MANGAWAN,
District REWA, Madhya Pradesh. PIN –
486117
Mob. +917869992139








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