Friday, 24 February 2017

(Rewa, MP) कैथा में गो भागवत का आठवां दिन – हवन, भंडारे, शिव पूजन के साथ हुआ कार्यक्रम का विसर्जन – गोसेवा एवं गोरक्षा से जीते जी धरती पर प्राप्त करें स्वर्ग


दिनांक – 24/02/2017, महाशिवरात्रि
 स्थान –  (रीवा, मप्र)


कैथा में गो भागवत का आठवां दिन – हवन, भंडारे, शिव पूजन के साथ हुआ कार्यक्रम का विसर्जन – गोसेवा एवं गोरक्षा से जीते जी धरती पर प्राप्त करें स्वर्ग  

(गढ़/गंगेव/कांकर, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित आठ दिवशीय साप्ताहिक श्रीमद गोभागवत कथा का समापन दिनांक 24 फरवरी 2017 को हवन एवं विशाल भंडारे के साथ हुआ. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय श्रद्धालु एवं शिवभक्त उपस्थित हुए.  
कार्यक्रम के आठवें दिन 24 फरवरी महाशिवरात्रि को दोपहर 12 बजे तक प्रवचन कार्य पूर्ण हुआ और साथ ही उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्य श्री चंद्रमणि पयासी जी ने गौरक्षा हेतु तत्पर रहने और गौसेवा हेतु प्रेरित किया. आज भारतीय समाज में गो और ब्रह्मण का पतित होकर इस प्रकार गिरना भारतीय समाज की दुर्दशा को दर्शाता है. आज प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य बनता है की वह अपने देश और उसकी संस्कृति के प्रति प्रतिबद्ध होवे और भारतीय संस्कृति की पहचान गौमाता की गौरवमयी इतिहास जिसमे कामधेनु एवं नंदिनी जैसी समुद्र मंथन से प्राप्त गौओं की महिमा और विशेषता का वर्णन हुआ है उसे भारत भूमि पर वापस लौटाएं. आचार्य श्री ने आगे कहा की सभी घरों में गौपालन को बढ़ावा देना चाहिए और सुबह उठकर सर्वप्रथम माता-पिता और गौमाता की परिक्रमा करके उन्हें नमन करना चाहिए और तब जाकर सभी कार्यों का सुभारम्भ करना चाहिए. यही हमारी श्रीराम और श्रीकृष्ण की धरती में शिखाया गया है एवं उसका अपने चरित्र में उतारना अति आवश्यक हो गया है. आचार्य जी ने कहा की गायों की महिमा के वर्णन से तो सम्पूर्ण हिन्दू धर्मग्रन्थ ही भरे पड़े हैं पर अब तक गो उपनिषद् और महिमा ग्रंथों के अतिरिक्त कोई गोमहापुराण जैसे ग्रन्थ नहीं बने हैं. आज गायों के विलोप होने और उनकी अवहेलना की जो स्थिति निर्मित हुई है उससे यह तय है की गो भागवत कथा जैसे कार्यक्रम भारतीय संस्कृति में और अधिक बढ़ेंगे परन्तु पुराण ग्रंथों के वाचन और श्रवण मात्र से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है इसे अपने चरित्र में उतारना और उसी के अनुसार गोसेवा और गोरक्षा करते हुए जीवन यापन करना और तब व्यक्ति के मरने के बाद फिर वैतरणी नामक किम्वदंती वाली नदी पार कर स्वर्ग जाने की मसक्कत नहीं करनी पड़ेगी और जीते जी ही हर एक भारतीय गोसेवा-गोरक्षा से वैतरणी पार कर धरती में ही स्वर्ग प्राप्त कर सकेगा.   

!!! सादर धन्यवाद !!!

संलग्न – प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण कैथा की कुछ तस्वीरें. धर्मार्थ समिति कैथा का लोगो.
             

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Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
(Social, Environmental, RTI and Human Rights Activists)
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