Tuesday, 21 February 2017

(Rewa, MP) कैथा में गो भागवत का छठा दिन – ईश्वरः स गवां मध्ये अर्थात गौओं के मध्य में ईश्वर की स्थिति होती है (महाभारत, अनु. 77/29)


Date: 22/02/2017, Place - Rewa (MP)

कैथा में गो भागवत का छठा दिन – ईश्वरः स गवां मध्ये अर्थात गौओं के मध्य में ईश्वर की स्थिति होती है (महाभारत, अनु. 77/29)

(गढ़/गंगेव/कांकर, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) पावन धर्मस्थली कैथा में श्रीमद गो भागवत कथा का पवित्र एवं पुण्य कार्यक्रम निरंतर अविरल प्रवाहित हो रहा हिया. इस बीच क्षेत्र से बहुतायत में श्रद्धालुगण आचार्य श्री चंद्रमणि पयासी जी के मुखारविंद से गो भागवत कथा का रसास्वादन करने के लिए एकत्रित हुए.
ज्ञातव्य है की गो भागवत कथा का यह कार्यक्रम यज्ञों की पावन स्थली कैथा के श्री हनुमान मंदिर प्रागण में दिनांक 17 फरवरी से प्रारंभ होकर दिनांक 24 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलता रहेगा. कार्यक्रम का समापन हवन, रुद्राभिषेक, एवं भंडारे के साथ दिनांक 24 फरवरी महाशिवरात्रि के दिन किया जायेगा.

इस्लाम एवं क्रिश्चियनिटी में गोवध निषेध का वर्णन

आज जो इस्लाम के नाम पर भी गोवंश वध और गोमांश भक्षण की परंपरा पूरे विश्व में चल रही है इससे मुस्लिम धर्म ग्रंथों के कुछ उद्धरण देना यहाँ पर आवश्यक हो जाता है जहाँ गौ और जीवों को कष्ट न पहुचाने की निरंतर बात आती है. देखें गाय के दूध के विषय में कितना बढ़िया आख्यान आया है. 1) “गौ का दूध और घी तुम्हारी तंदुरस्ती के लिए बहुत जरूरी है. उसका गोस्त नुकसानदेह और बीमारी पैदा करता है जबकि उसका दूध भी दवा है” – हज़रत मुहम्मद (नासिहाते हादौ). 2) गाय का दूध बदन की खूबसूरती और तंदुरुस्ती बढ़ाने का बड़ा जरिया है. हज़रत मुहम्मद (बेगम हज़रत आयशा से). 3)  अच्छी तरह पलीं हुई 90 गायें 16 वर्षों में न शिर्फ़ 450 गायें और पैदा करती हैं बल्कि उनसे हजारों रुपये का दूध और खाद भी मिलता है. गाय दौलत की रानी है. हज़रत मुहम्मद (मौला फारुखी द्वारा संकलित, बरकत और सरकत में).
इस प्रकार बड़े ही आसानी से देखा जा सकता है की भले ही आज इस्लाम में भी गोमांश भक्षण की परंपरा बढ़ रही है परन्तु स्वयं हज़रत मुहम्मद साहब ने गायों के गुणों और महिमा का वर्णन किया है और उनकी प्रसंसा की है. भला जो गौओं की प्रसंसा कर रहे हैं उनकी हत्या की बात कैसे कर सकते हैं. आज दुर्भाग्य बस पाश्चात्य संस्कृति और विदेशी आसुरी संस्कृतियों के प्रभाव से पूरे विश्व में गायों और अन्य जीवों का निरंतर अपमान होता आ रहा है इन बेजुवान जीवों को ईश्वर के अंश न समझ कर उन्हें खाद्य और उपभोग की वस्तु समझा जा रहा है. जहाँ तक प्रश्न ईशाई धर्म का है स्वयं ईशा मसीह ही शांति के दूत के रूप अपने आपको धरती पर ईश्वर पुत्र बताते हैं तो भला जो शांति का दूत है वह जीवों की हत्या और उनके मांस भक्षण की बातें कैसे कर सकता है.

      आधुनिक मुस्लिम शासकों ने गोहत्या और गोवध पर प्रतिबन्ध लगाया

ऐसा भी नहीं की इस्लाम में गोहत्या और गोवध का जिक्र मात्र हज़रत मोहम्मद साहब के द्वारा ही कहा गया. इसका पालन बाद के इस्लामिक शासन काल में हुआ. भारतीय संस्कृति की जड़ और गहराई को देखते हुए कई मुस्लिम शासकों ने गौहत्या और गोवध पर प्रतिबन्ध लगाया था इसका गवाह पूरा इतिहास है. मुग़ल बादशाह बहादुरशाह के विशेष पीर मौलवी कुतुबुद्दीन साहब ने फतवा दिया था की हदीस में कहा है की जाबेहउलबकर (गाय की हत्या करने वाला) कभी नहीं बक्शा जाना चाहिए. ब्रिटिश काल में नवाब रावनपुर, नवाब मंगरौल, नवाब दुजाना, नबाव गुडगाँव, नवाब मुर्शिदावाद  आदि मुस्लिम शासकों ने गौहत्या पर प्रतिबन्ध लगाया था ऐसा इतिहास में आता है. लखनऊ के छः उल्मायें सुन्नत ने गोहत्या बंदी का फतवा दिया था. इमाम जाफर साहब ने इरशाद फ़रमाया था “गाय का दूध दावा है इसके मख्खन में तंदुरुस्ती है और मांस में बीमारी है”. आगे आया है की “मुसलमान को गाय नहीं मरना चाहिए. ऐसा करना हदीस के खिलाफ है (मौलाना हयात साहब खानखाना हाली समद साहब)”. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्द सेनानी हकीम अजमलखां का कहना है “न तो कुरआन और न ही अरब की प्रथा ही गाय की क़ुरबानी की इज़ाज़त देती है”
      इस प्रकार देखा जा सकता है इतिहास और अन्य धर्म प्रचारकों के वक्तव्य से यह भलीभांति स्पष्ट हो जाता है की भले ही गायों के प्रति निर्दयता और उनके मांस भक्षण की राक्षसी और आसुरी परंपरा बढ़ गयी हो परन्तु किसी भी धर्म ग्रन्थ और किसी भी सम्प्रदाय में गौहत्या होना नहीं बताया गया हेयर और निश्चित तौर पर उपरोक्त कथानकों से तो यहाँ तक स्पष्ट हो चुका है की इस्लाम भी गौहत्या और जीव हत्या की भर्त्सना करता है. जहाँ तक प्रश्न भारतीय संस्कृति में पले बढे और उपजे धर्म-सम्प्रदायों जैसे हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिख, आदि का है तो निश्चित रूप इन सभी में तो गौ की महिमा का इतना वखान आया है ही सम्पूर्ण धर्म शास्त्र ही इनके महिमा से भरे पड़े है.
      अतः आज आवश्यकता है भारतीय संस्कृति को पुनः समझाने की. अहिंसा के सिद्धांत को समझकर उसे पालन करने की, अपने चरित्र में स्थापित करने की.

!!! सादर धन्यवाद !!!

संलग्न – प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण कैथा की कुछ तस्वीरें. धर्मार्थ समिति कैथा का लोगो.
             

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Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
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