Monday, 20 February 2017

(Rewa, MP) कैथा में गो भागवत का पांचवां दिवश- संसार की श्रेष्ठतम पवित्र वस्तु है गौ


 दिनांक – 21/02/2017, स्थान –  (रीवा, मप्र)

 कैथा में गो भागवत का पांचवां दिवश- संसार की श्रेष्ठतम पवित्र वस्तु है गौ

(गढ़/गंगेव/कांकर, रीवा मप्र – शिवानन्द द्विवेदी) यज्ञों की पावन स्थली कैथा के श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में श्रीमद गौ भागवत कथा का पुण्य प्रवचन सतत अविरल प्रवाहित हो रहा है. आचार्य श्री चंद्रमणि पयासी जी महाराज के मुखारविन्द से गौ भागवत कथा का प्रवचन कार्य निरंतर दिनांक 24 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलता रहेगा.
इस बीच पांचवें दिन के प्रवचन में आचार्य श्री ने गौमाता की महिमा का वखान करते हुए आगे बताया की प्रभु का अवतार ही इस श्रृष्टि में गौ और ब्राह्मण के रक्षार्थ हुआ है.
तुलसीकृत श्रीराम चरितमानस में कहा है

 “जब जब होई धरम के हानी | बढ़हिं असुर अधम अभिमानी|| करहिं अनीति जाई नहीं बरनी | सीदहिं विप्र धेनु सुर धरनी ||”

अर्थात जब-जब इस श्रृष्टि में धर्म की हानि अर्थात अधर्म का बढ़ावा होने लगता है, आसुरी प्रवृत्ति के राक्षसों का अभिमान अपने चरम पर बढ़ने लगता है और तमाम हाहाकार होने लगता है. श्री तुलसीदास जी कहते हैं की अनीति इतनी अधिक बढ़ जाती है जिसे वखान करना मुश्किल पड़ जाय. इस प्रकार विप्र, धेनु, देव, और धरती के रक्षार्थ प्रभु इनका दुःख क्लेश दूर करने अवतार लेते हैं.

गाय भारतीय धर्म-दर्शन एवं संस्कृति की प्रतीक

भारतीय संस्कृति में गाय वैदिक काल से ही धर्म और संस्कृति-सभ्यता की प्रतीक रही है. स्वयं वेद गाय को नमन करते हुए कहते हैं – “अघ्न्ये ते रूपये नमः|” अर्थात हे अवध्य गौ तेरे स्वरुप के लिए प्रणाम है (ऋग्वेद 1|154|6) के अनुसार जिस स्थल पर गाय सुखपूर्वक निवास करती है वहां की धूल तक पवित्र हो जाती है, वह स्थान तीर्थ बन जाता है.”
भगवान् श्रीकृष्ण जी ने तो यहाँ तक कामना की है की “गायें मेरे आगे हों, मेरे पीछे हों, गायें मेरे सब ओर हों और मैं गायों के मध्य वास करूं”
चक्रवर्ती सम्राट दिलीप ने तो गोरक्षार्थ अपना कांतिमय शरीर ही सिंह के समक्ष अर्पित कर दिया और कहा की क्षत से त्राण करने के कारण ही “क्षत्रिय” शब्द का प्रादुर्भाव हुआ, और यदि अपनी आँखों के समक्ष यदि शेर से मैं नंदिनी गौ की रक्षा नहीं कर सका तो “क्षत्र” शब्दार्थ के विपरीत आचरण के कारण जनमानस की निंदा का कारण बनूँगा इसलिए बेहतर यही है की इस निंदा से बचने वास्ते मैं अपने शरीर को ही क्यों न इस सिंह को अर्पित कर दूं और इसके एवज में यह सिंह नंदिनी गौ को छोंड़ देगा. इस प्रकार भारतीय संस्कृति में ऐसे पराक्रमी और धर्मनिष्ठ राजा हुए हैं जिन्होंने ने गौ और ब्राह्मण की रक्षार्थ अपना शरीर सर्वस्व अर्पित कर दिया. परन्तु आज दुर्भाग्य है की वही मानव अपनी सभ्यता संस्कृति को भूलकर गौमांश भक्षी हो गया है और गौ हत्या के घृणित कार्य में तत्पर हो चुका है.

महात्मा गाँधी और गोरक्षा के उनके प्रयास

आधुनिक काल में महात्मा गाँधी एक ऐसे महान व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने जीवहत्या और गौहत्या से व्यथित होकर अपना पूरा जीवन ही भारतीय संस्कृति के लिए समर्पित कर दिया. मेरी आत्मकथा अथवा सत्य के अनुप्रयोग (माय ऑटोबायोग्राफी ऑर एक्सपेरिमेंट विथ ट्रुथ) नामक पुस्तक में कई मर्तबा जिक्र आया है की किस तरह उन्होंने अपनी माता को शाकाहारी एवं भारतीय-हिन्दू संस्कृति पर आधारित जीवन जीने का जो वचन दिया था वह ब्रिटेन जैसे ठंडे मांसाहारी देश में रहते हुए भी पालन करने का पूरा प्रयास किया और सफल भी रहे. उन्होंने अपने मित्रों के साथ मिलकर ब्रिटेन में वेजीटेरियन सोसाइटी की स्थापना किया.
      महात्मा गाँधी ने तो गौहत्या और स्वराज्य पर अपने वक्तव्य देते हुए यहाँ तक स्पष्ट कहा की यदि स्वराज्य हमे देरी से मिले तो कोई फर्क नहीं पड़ता पर जहाँ तक प्रश्न है गौहत्या का तो भारतीय भूमि में सबसे पहले बंद होनी चाहिए. 1857 का स्वतंत्रता संग्राम ही भारतीय धर्मावलम्बी सिपाहियों द्वारा गाय की चर्वी लगी कारतूस प्रयोग न करने के कारण हुई. जो बाद में चलकर स्वराज्य आन्दोलन एवं स्वतंत्रता संग्राम का विस्तृत रूप ले लिया. अंग्रेजों अथवा भारतीय इतिहास में किसी शासन काल से भारतीय मन को शायद कोई इतनी विशेष व्यथा नहीं थी जितनी की गौ हत्या और गौमांस भक्षकों से. ईसाई धर्म गो हत्या को पुण्य नहीं बताता और गोरक्षा होना इस्लाम के भी विरुद्ध भी नहीं, और जहाँ तक प्रश्न है भारतीय संस्कृति में बढ़े पनपे धर्म-सम्प्रदायों जैसे हिन्दू, बौद्ध, जैन, पारसी, सिख, आदि का तो यह सभी धर्म-सम्प्रदाय गोरक्षा की मांग करते हैं. अतः जहाँ तक प्रश्न भारतीय मनोवृति का है तो निश्चित ही गोरक्षा का प्रश्न राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सौमनस्य संपादित करने का ठोस आधार है.


!!! सादर धन्यवाद !!!

संलग्न – प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण कैथा की कुछ तस्वीरें. धर्मार्थ समिति कैथा का लोगो.
             

-------------------
Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
(Social, Environmental, RTI and Human Rights Activists)
Village - Kaitha, Post - Amiliya, Police Station - Garh,
Tehsil - Mangawan, District - Rewa (MP)
Mob - (official) 07869992139, (whatsapp) 09589152587
TWITTER HANDLE: @ishwarputra - SHIVANAND DWIVEDI 


No comments:

Post a Comment