दिनांक - 23/02/2017, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र,
(गढ़/गंगेव, रीवा मप्र - शिवानन्द द्विवेदी) पावन यज्ञ स्थली कैथा में दिनांक 17 से 24 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलने वाले गो भागवत कथा में आचार्य श्री चंद्रमणि पयासी जी महाराज ने सातवें दिन की कथा प्रसंगों और अपने प्रवचन में आगे बताया की गौ-हत्या और गौ-वंशों के अपमान में संलिप्त समाज और लोगों से असहयोग करना अनिवार्य है. गौमांस भक्षण और गौवध में रत समाज और व्यक्तियों से खान-पान से लेकर रोटी-बेटी तक का सभी सम्बन्ध विक्षेद कर देना चाहिए. यदि हमारे घरों में मोटर-वाहन कम हैं तो कोई फर्क न पड़े पर अपने-अपने घरों में सामर्थ्य के अनुसार गौपालन अवश्य करना चाहिए. भैंस के स्थान पर भारतीय नस्ल की गौपालन को बढ़ावा देना चाहिए और गाय का ही पवित्र पौष्टिक दूध और दुग्ध उत्पाद का सेवन करना चाहिए. आचार्य ने आगे बताया की महिषी अर्थात भैंस राक्षसी प्रवित्ति से सम्बंधित है इसीलिए माँ दुर्गा ने अवतार लेकर महिषासुर का वध किया था. आज मानव समाज में महिषी अर्थात भैंस के दूध-घी और अन्य उत्पाद खाने-पीने से ही व्यक्ति की बुद्धि पथ भ्रष्ट हो तमाशिक होती जा रही है जिससे गौवंशों का अपमान बढ़ता जा रहा है और गौपालन को बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है. आज आवश्यकता है भारतीय संस्कृति के अनुरूप पुनः गौपालन को बढ़ावा देकर भारतीय संस्कृति में समस्त जीवों की आत्मा और जीव जगत की माता मानी जाने वाली गौमाता के शरण में जाकर अपने समस्त कर्मों को पुनः सात्विक दृष्टि प्रदान करने की. सत्य, न्याय, धर्म, अहिंसा, परोपकार के मार्ग पर चलकर समस्त जीव जगत में एक ही परमेश्वर के दर्शन करने की जो की भारतीय धर्म-दर्शन की वास्तविक पहचान है.
इस प्रकार आचार्य जी ने आगे बताया की पुराने बूढ़े हो चुके बैलों और गोवंशों को कसाइयों के हाँथ कभी न बेचें. उन सरकारों का चयन अपने मताधिकार में करें जो गोरक्षा के प्रति वचनबद्ध हो और जीवों के प्रति अनैतिक और अधार्मिक हिंसा को बढ़ावा न देती हो साथ ही हिंसा बंद करने और शांति स्थापित करने में मदद करने वाली हो. सभी देशवाशियों को गोशाला बनाने में यथा संभव योगदान देना चाहिए और सरकारों पर भी दबाब बनाना चाहिए जिससे सार्वजनिक गौशालाओं और गोरक्षा को बढ़ावा मिले.
इस प्रकार धार्मिक अध्यात्मिक स्तर के अतिरिक्त भी सामाजिक और राजनैतिक स्तर पर उतरते हुए आचार्य जी ने गोरक्षार्थ प्रत्येक देशवासी को अपने हर यथा संभव प्रयास करते रहने की बात कही. आचार्य जी ने आगे बताया की गौ हत्या बंद करने और गौवंश प्रताड़ना बंद करने को लेकर सामूहिक शांति पूर्वक धरना प्रदर्शन, सामूहिक हस्ताक्षर अभियान आदि निरंतर चलाये जाने चाहिए. गौवंश और गोरक्षा हेतु सामाजिक, राजनैतिक, धार्मिक, अध्यात्मिक हर स्तर से निरंतर प्रयास जारी रहने चाहिए. आचार्य जी ने आगे बताया की भारतीय संस्कृति और हम सभी भारतीयों की पहचान ही गोमाता है और यदि हम गोरक्षा की दिशा में आगे नहीं बढे और तन-मन-धन अर्थात मनसा-कर्मणा-वाचा से प्रयास नहीं किया तो हमारी संस्कृति के साथ साथ हमारा स्वयं का विलोप हो जायेगा. आज गोरक्षा का सरोकार सीधे मानवता और पर्यावरण सुरक्षा से हो चुका है इस बात को विज्ञान भी उसी दृढ़ता और प्रूफ के साथ कह रहा है. गौवंश न होने से जमीन की उर्वरा शक्ति क्षीण होगी, अकाल, अति वृष्टि, सूखा आदि महामारी की स्थिति निर्मित होगी. श्रृष्टि के तापमान में हो रहे निरंतर बदलाव से स्थितियां इतनी भयानक हो सकती हैं जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती. इसलिए स्वार्थी मानव के लिए गोरक्षा के अतिरिक्त भी स्वयं की जान बचाने के लिए भी गोवंश रक्षा और शाकाहार पर आधारित हो जाना ही एकमात्र समाधान बचा है.
दिनांक 24 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन पूरे आठ दिवशीय कार्यक्रम का समापन हवन, रुद्राभिषेक, एवं विशाल भंडारे के साथ किया जायेगा इस बीच सभी श्रद्धालुओं और धर्मावलम्बी महानुभाओं को सादर आमंत्रित किया जाता है.
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Sincerely Yours,
Shivanand Dwivedi
(Social, Environmental, RTI and Human Rights Activists)
Village - Kaitha, Post - Amiliya, Police Station - Garh,
Tehsil - Mangawan, District - Rewa (MP)
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