Sunday, 19 August 2018

कैथा में भागवत कथा का प्रथम दिन - बिना ईश्वर संसार अपूर्ण है

दिनांक 19 अगस्त 2018, स्थान गढ़/गंगेव, रीवा मप्र

(कैथा से, शिवानन्द द्विवेदी)

  पावन यज्ञस्थली कैथा में श्रीमद भगवद महायज्ञ कलश यात्रा के साथ दिनांक 18 अगस्त को प्रारम्भ हुआ. दिनांक 19 अगस्त को बैठकी का कार्य पूरा हुआ और श्रीमद भगवद कथा का प्रथम स्कंध प्रारम्भ हुआ. विधिविधान से वेदीपुजन एवं नवग्रह पूजन आदि किया गया. वेदीपूजा नवग्रह पूजन आदि पूजन का कार्य आचार्य शिवशंकर शुक्ला के द्वारा कराया जा रहा है जिंसमे प्रतिदिन शुबह पूजन कार्य किया जाता है साथ ही सायंकाल में पूजा आरती आदि का कार्य भी उन्ही के द्वारा कराया जा रहा है.

आचार्य दिलीप जी के मुखारविंद से भागवत कथा प्रवचन

   आयोजित भागवत कथा में प्रवचन का कार्य आचार्य श्री दिलीप जी के मुखारविंद से हो रहा है. आचार्य जी ने बताया की श्रीमद भगवद कथा के नित्य श्रवण और पाठन से समस्त अधिभौतिक, आधिदैविक, एवं आध्यात्मिक ताप अर्थात कष्ट नष्ट होकर जीवात्मा मोक्ष की प्राप्ति करती है. भागवत कथा जीवन को धन्य बनाती है. उन्होंने बताया की परमात्मा श्रीकृष्ण परिपूर्ण सत, चित, एवं आनंद स्वरूप हैं. बिना ईश्वर के यह संसार अपूर्ण है, ईश्वर बिना यह जीव भी अपूर्ण है. श्रीकृष्ण परिपूर्ण ज्ञानी हैं. सबका विनाश हो रहा है फिर भी श्रीकृष्ण के आनंद का विनाश नही होता, कारण श्रीकृष्ण तो स्वयं ही आनंद स्वरूप हैं. सत नित्य है, चित ज्ञान है, चित-शक्ति अर्थात ज्ञान-शक्ति. मनुष्य अपने स्वरूप में स्थित नही है अतः इसे आनंद नही मिलता.  आचार्य जी ने आगे बताया की मनुष्य एकांत में अपने स्व-स्वरूप में स्थित नही रहता जबकि ईश्वर तो उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार सभी में एक सा बना रहता है. परमेश्वर की संहार लीला भी ठाकुरजी का स्वरूप है. अतः ईश्वर के स्वरूप में कोई परिवर्तन नही होता है. ईश्वर सभी में एक बना रहता है और सभी का आनंद लेता है जबकि जीव में यह संभव नही होता.जीव को यदि आनंदरूप होना है तो उसे सच्चिदानंद का ही आश्रय लेना पड़ेगा. यह जीव जबतक परिपूर्ण नही होता तब तक उसे शांति नही मिल सकती. अतः परमेश्वर की शरण लेने के बाद जीव को शांति मिल सकती है. 

  भागवत कथा का महात्म्य एवं प्रथम स्कंध का वर्णन

  इस बीच दिनांक 19 अगस्त को बैठकी के दिन भागवत महापुराण के द्वादस अर्थात 12 स्कन्धों में से प्रथम स्कंध का वर्णन चल रहा है जिंसमे भागवत का उद्देश्य एवं उसके महात्म्य के साथ अन्य कथा प्रसंगों का वर्णन चल रहा है. परमात्मा के तीन स्वरूप- सत, चित आनंद का वर्णन, परमात्मा का दर्शन एवं इसके प्रकार, कर्म, भक्ति एवं ज्ञान  मार्ग का वर्णन, धुंधकारी के प्रेतयोनि का वर्णन, गोकर्ण के आख्यान का वर्णन आदि कथा प्रसंगों का वर्णन किया जा रहा है. श्रीमद भगवद सप्ताह कथा की विधि का भी वर्णन किया गया.  

  इस बीच खराब मौसम एवं बारिश के वावजूद भी भक्त श्रद्धालुगण श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण कैथा में पधार रहे हैं और अमृतमयी पापविनाशक भागवत कथा का आनंद ले रहे हैं.

संलग्न - संलग्न फ़ोटो में श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण कैथा में कथा स्थल की फ़ोटो.

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शिवानन्द द्विवेदी, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता,

ज़िला रीवा, मप्र, मोबाइल 9589152587, 7869992139,

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