दिनांक 25 मार्च रामनवमी 2018, स्थान – पावन यज्ञस्थली कैथा स्थित श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण से, रीवा मप्र
(कैथा, शिवानंद द्विवेदी, रीवा मप्र)
श्रीराम नवमी के पावन उपलक्ष्य पर 25 मार्च को पावन यज्ञस्थली कैथा स्थित अति प्राचीन श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण मे कन्याभोज, संगीतमय भगत, एवं सूक्ष्म भंडारे का आयोजन किया गया। इस बीच कैथा और आसपास के ग्राम क्षेत्र के श्रद्धालुगण उपस्थित होकर भगत और भंडारे मे सम्मिलित हुये।
बता दें की पावन भूमि कैथा कई मायनों मे महत्वपूर्ण है जहां पर विभिन्न प्रकार के आयोजन होते रहते हैं। अभी पिछले दिनों 18 मार्च से 24 मार्च तक चैत्र नवरात्रि के शुभवसर पर कैथा स्थित प्राचीन श्रीमद शारदा देवी मंदिर प्रांगण मे परंपरागत रूप से आयोजित होने वाली श्रीमद भगवद कथा का आयोजन हुआ जिसका समापन हवन एवं भंडारे के साथ दिनांक 24 मार्च को सम्पन्न हुआ।
श्रीराम नवमी पर विशेष – श्रीराम जी का आदर्श एवं पावन चरित्र है अनुकरणीय
बाल्मीकीकृत रामायण ग्रंथ मे सर्वप्रथम भगवान श्रीराम जी के पावन चरित्र का वर्णन आता है। इसके पश्चात लगभग विश्व की समस्त भाषाओं मे रामायण का अनुवाद किया जा चुका है। तुलसीकृत श्रीरामचरितमानस अवधी भाषा मे लिखा एक अत्यंत सुंदर ग्रंथ है जिसकी गणना इतिहास ग्रन्थों मे की जाती है। चूंकि संस्कृत की भाषा सभी के लिए उतनी सरल नहीं थी अतः इस बात को ध्यान मे रखते हुये कई लेखक और कवियों ने रामायण को लगभग सभी भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं मे अनुवाद किया है। तमिल,तेलगु, मराठी, कन्नड सहित सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रीय भाषाओं मे भी रामायण का अनुवाद कुछ विशेष जोड़ते हुये उपलब्ध है। यह बात भी सत्य है की रामायण के विभिन्न भाषाओं मे अनुवाद करते समय कवियों लेखकों ने मूल अर्थ मे भी परिवर्तन करने का भी प्रयास किया है परंतु यह उस क्षेत्र विशेष की रुचि आदि पर आधारित कहा जा सकता है। यद्यपि कई अनुवादों मे तो कुछ ज्यादा ही परिवर्तन कर दिया गया है जिसे काफी आलोचना का सामना भी करना पड़ा है।
वहरहाल जो मूल रामायण ग्रंथ है उसमे भगवान श्रीराम को एक अत्यंत आदर्श और पावन चरित्र के रूप मे बताया गया है। भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं जिहोने कभी भी किसी भी विषम से विषम स्थिति मे मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं किया है। अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्यों का सुंदर निर्वहन किया, पिता की आज्ञा का पालन करते हुये सहर्ष 14 वर्ष का वनवास ग्रहण कर लिया जबकि यदि आज का कलयुगी पुत्र होता माता पिता को ही घर से खदेड़ देता, सौतेली माता कैकेई को अपनी सगी माता कौशल्या से अधिक मान्यता दिया, भाई लक्ष्मण सहित भरत एवं सत्रुघ्न के प्रति अपने बड़े भाई होने की पूरी ज़िम्मेदारी का निर्वहन किया। जिस प्रकार सीताजी श्रीराम के प्रति आदर्श पतिव्रत भाव को सदैव हृदय मे बसाये रखीं उसी प्रकार श्रीराम जी ने भी सीताजी के प्रति एक आदर्श पत्नी भाव को सदैव हृदय मे रखा। गुरु विश्वामित्र की आज्ञा का पालन करते हुये राक्षसों का संहार कर ऋषि मुनियों के निर्वाध यज्ञ और तपस्या का रास्ता साफ किया। यहाँ तक की उनकी पत्नी के चरित्र पर धोबियों द्वारा प्रश्न उठाने पर उन्होने अपनी आदर्श पत्नी को भी त्याग कर दिया। यद्यपि इस बात को लेकर आज का कलयुगी भ्रष्ट और नास्तिक मानव श्रीराम जी की भी आलोचना करते नहीं थकता। श्रीराम एक आदर्श पति, एक आदर्श भाई, एक आदर्श शिष्य, एक आदर्श पुत्र,और यहाँ तक की एक आदर्श शत्रु भी थे। आदर्श शत्रु इसलिए भी क्योंकि उन्होने शत्रुत्व की भी मर्यादा का भी उल्लंघन कभी नहीं किया। रावण जैसे घोर राक्षसों पर भी पीछे से छल पूर्वक कभी हमला नहीं किया। सम्पूर्ण रामायण ग्रंथ और श्रीरामचरितमानस इस बात का गवाह है की श्रीराम ने असुर रावण को भी सुधरने का खूब मौका दिया, श्रीहनुमान, अंगद को दूत रूप मे रावण के पास भेजा की शायद वह सुधर जाये और सीताजी को श्रीराम जी के पास वापस कर दे लेकिन श्रीराम की बात को न मानकर श्रीराम को छोटा समझ कर उसने अपने अहंकार की पराकाष्ठा कर दी जिसके कारण अंततः रावण को मृत्यु के घाट उतरना पड़ा। जहां श्रीराम का चरित्र पावन और पुनीत है वहीं रावण का चरित्र एक भयावह रक्षस का है जिसने अपने अहंकार अत्याचार के वसीभूत होकर धर्म की अवहेलना की और अधर्म का साम्राज्य स्थापित करने का प्रयाश किया। परंतु अंत मे जीत धर्म और सत्य के परिचायक भगवान श्रीराम की ही हुई वहीं अधर्म अत्याचार असत्य के परिचायक रावण को नष्ट होना पड़ा। रामायण आज भी मानवता प्रेमियों के लिए एक आदर्श ग्रंथ है जिसमे मानव को किस प्रकार का जीवन यापन करते हुये जीवन निर्वाह करते हुये मोक्ष की प्राप्ति की जाये इसका पूरा मार्गदर्शन मिलता है। भारतीयों और आर्यावर्त के लिए राम परम पूज्य आराध्य भगवान साक्षात ईश्वर के अवतार हैं जिनको आज भी प्रत्येक भारतीय अपने हृदय मे रखता है। हर माँ बाप चाहता है की उसे राम जैसा पुत्र मिले। हर स्त्री चाहती है की उसे राम जैसा आदर्श पति मिले, हर भाई चाहता है की उसे राम जैसा बड़ा भाई मिले, हर गुरु चाहता है की उसे श्रीराम जैसा शिष्य मिले। यहाँ तक की हर शत्रु भी चाहेगा की उसे श्रीराम जैसा उसका विपक्षी मिले जिनके हांथ से मृत्यु भी प्राप्त करने पर वह शत्रु भी मोक्ष को ही प्राप्त करे।
श्रीराम सम्पूर्ण मानवता के लिए आदर्श हैं
श्रीराम भारतीय समाज ही नहीं वरन सम्पूर्ण मानवता के लिए आदर्श हैं। यदि मानवता को बने रहना है तो श्रीराम के ही चरित्र और आदर्शों को अपनाना पड़ेगा नहीं तो जिस प्रकार वर्तमान समय चल रहा है ऐसे मे इस वैश्विक संस्कृति का विनष्ट होना लगभग तय है। क्योंकि आज मानव जाति मे कोई मर्यादा शेष नहीं रह गई है। सब कुछ इतना अधिक स्वछंद होता जा रहा है की सामाजिक और परवारिक मूल्य पूरी तरह से समाप्त होते जा रहे हैं। आज माता पिता की आज्ञा मानने की बात तो दूर की रह गई है आज मानव अपने माता पिता को वृद्धावस्था से पहले ही घर से बाहर का रास्ता दिखा देता है, आज ज़्यादातर शहरी शादियाँ ज्यादा समय टिक नहीं पा रही हैं। मेट्रो कल्चर मे आज तलाक लेना आम बात हो चुकी है। पश्चिमी सभ्यता का आज इतना आधिक्य हो चुका है कि भारतीय समाज खंड-विखंड होता जा रहा है। एक स्त्री द्वारा तलाक लेकर कई पतियों को बदलना और एक पुरुष का भी तलाक लेकर कई पत्नियों को बदलना भारतीय संस्कृति की पहचान नहीं है परंतु आज ऐसी स्थिति निर्मित हो रही है की यह सब फ़ैशन बनता जा रहा है। ऐसे मे आज श्रीराम जी का आदर्श और पावन चरित्र का अनुकरण ही विनष्ट होते सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों को नई जान दे सकते हैं और मिटती संस्कृति को बचा सकते हैं।
संलग्न – पावन यज्ञस्थली कैथा स्थित अति प्राचीन श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण मे श्रीराम नवमी पर आयोजित भगत, कन्याभोज, एवं सूक्ष्म भंडारे का दृश्य
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शिवानंद द्विवेदी, संयोजन एवं प्रचारक श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत।7869992139 ज़िला रीवा मप्र।
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