स्थान – कैथा-गढ़ (रीवा, म.प्र.), दिनांक: 29.09.2016, दिन गुरुवार,
कैथा के श्री हनुमान
मंदिर प्रांगण में दिनांक 01 अक्टूबर से सजेगा मातारानी का दरबार और होगा शारदेय नवरात्रि
का आयोजन. कार्यक्रम की तैयारी जोरों पर.
(कैथा-गढ़,
रीवा) यज्ञों की पावन स्थली
कैथा के श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में प्रतिवर्ष नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित
होने वाली दुर्गोत्सव झांकी का आयोजन दिनांक 01 अक्टूबर से होगा जो अगले नौ दिनों
तक चलेगा जिसका समापन विशाल भंडारे के साथ श्रीदुर्गा नवमी को दिनांक 10 अक्टूबर
को होगा. अगले ही दिन दिनांक 11 अक्टूबर को दसहरे का आयोजन भी मंदिर प्रांगण में
हो होगा.
कैथा और उसके आसपास के क्षेत्रों में सजेगा
मातारानी का दरबार -
ज्ञातव्य है की प्रतिवर्ष कई धार्मिक आयोजन पावन
स्थली कैथा में होते हैं और विभिन्न हिन्दू धर्म के पर्वों और त्योहारों पर पूरे
साल भर चलते रहते हैं. कैथा और उसके आसपास के अन्य ग्राम क्षेत्रों जैसे - हिनौती,
करहिया, डाढ़, भठवा, लालगांव, गढ़, कटरा जमुई, बांस, मदरी आदि कई ग्रामों में पूरे
देश की भांति नवरात्रि का यह विशेष धार्मिक आयोजन कई तरह की मातारानी की झांकियों
के साथ आयोजित होता हैं.
सत्य अहिंसा और धर्म की आधारशिला है सनातन
धर्म -
हिन्दू धर्म त्योहारों और पर्वों का धर्म है.
सत्य, अहिंसा, धर्म, की आधारशिला पर केन्द्रित हिन्दू धर्म एक सनातन धर्म है. यह
धर्म अन्य सम्प्रदायों से अलग भी है क्योंकि यह समग्र है और सबको अपने में समाहित भी
किये हुए है. सनातन धर्म पूर्णतया वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवन्तु सुखिनः की
परंपरा पर आधारित है. सनातन धर्म में न केवल मानव मात्र बल्कि सभी जीवों, स्थावर
जंगम, चराचर जगत में एक ही परमात्मा को देखा जाता है. कर्मफल और पुनर्जन्म के
सिद्धांत पर आधारित सनातन धर्म एक अत्यंत वैज्ञानिक धर्म है जिसको आज विज्ञानं भी
सर्वसम्मति के साथ मानता है. सनातन धर्म के चारों वेदों में जो सूक्तियां हैं वह कभी
भी परिवर्तित नहीं होती हैं और प्रत्येक हिन्दू धर्मावलम्बी इन चारों वेदों को
ईश्वर की वाणी मानता है.
ईश्वरीय शक्ति द्वारा नव श्रृजन और नव श्रृष्टि
का भी पर्व है नवरात्रि -
नवरात्रि का तात्पर्य है श्रृष्टि श्रृजन की नयी
रात्रि. अर्थात जब अधर्म अनाचार, अत्याचार, भ्रस्ट्राचार और अनैतिकता अपने चरम पर
हो तो वह परमब्रह्म परमेश्वर अपने विकराल महाकाल रूपी स्वरुप में आकर इस भौतिक
श्रृष्टि का संहारकर्ता है और तब वह ब्रह्म अपने निराकार स्वरुप को प्राप्त करता
है. परन्तु इस मायारूपी श्रृष्टि का पुनः श्रृजन होना सुनिश्चित होता है अतः वह
निराकार ब्रह्म अपने साकार शक्ति के साथ इस श्रृष्टि का श्रृजन करता है. इस प्रकार
नवरात्रि का एक यह भी तात्पर्य है. हिन्दू पंचांग में वर्ष में कुल चार नवरात्रि
मनाई जाती हैं जिनमे दो नवरात्रि अपना विशेष महत्व रखती हैं. एक शारदेय नवरात्रि
जो हिन्दू पंचांग के अश्विन शुक्ल पक्ष और अंग्रेजी के अक्टूबर महीने के आसपास आती
है और दूसरी चैत्र नवरात्रि जो अप्रैल महीने के आसपास आती है. चैत्र नवरात्रि
हिन्दू धर्म में नववर्ष के रूप में भी मनाई जाती है. जिस प्रकार ईस्वी सन का नया
वर्ष जनवरी महीने से प्रारंभ होता है वैसे ही सनातन धर्मावलम्बियों का नववर्ष
चैत्र माह से प्रारंभ होता है.
नवरात्रि में पूजा और व्रत से पूर्ण होती है सभी धर्मविहित
मनोकामनाएं -
इस प्रकार शारदीय और चैत्र नवरात्रि भारतीय एवं
हिन्दू संस्कृति के अत्यंत महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक हैं. इस दरमयान
धर्मावलम्बी श्रद्धालुजन पूरे नौ दिन का कठिन व्रत रखते हैं और अपने इस जन्म को
सफल बना अर्थ, काम, धर्म, मोक्ष की कामना करते हैं. चूँकि नवरात्रि मूलरूप से
शक्ति की उपासना का पर्व है अतः द्वैतवाद के सिद्धांत के अनुसार ज्यादातर उपासकों
के लिए यह उपासना सकाम ही होती है अर्थात यह नवरात्रि उपासना कुछ विशेष कामना के
साथ की जाती है. और अंत में जो जिस भाव से माता के दरबार में जाते हैं उन्हें वह
प्राप्त भी होता है.
असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म के विजय का पर्व
है दसहरा -
शारदीय नवरात्रि के अगले ही दिन नवमी के बाद
दसवीं अर्थात विजयदसवीं या दसहरा आता है जिसमे शास्त्रों में कई अलग-अलग वर्णन
मिलता है. एक वर्णन के अनुसार जब भगवान् श्रीराम लंकाधिपति रावण का संहार करके वापस
अयोध्या लौटे थे और उनका राजतिलक हुआ था उस विजय पर्व के रूप में भी दसहरा मनाया
जाता है. इसीलिए भारतीय संस्कृति में दसहरा की रात्रि को रावण कुम्भकर्ण और मेघनाद
के पुतले जलाने की आदिकाल से परंपरा चली आ रही है. दसहरे का पर्व धर्म की अधर्म और
सत्य की असत्य पर विजय के रूप में मनाया जाता है.
अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में
नवरात्रि के पावन अवसर पर सजने वाले माता के दरबार में दिनांक 01 अक्टूबर से 10
अक्टूबर तक आप सभी सादर आमंत्रित हैं.
|||धन्यवाद|||
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शिवानन्द द्विवेदी
(प्रचारक, प्रवक्ता एवं
राष्ट्रीय संयोजक)
श्रीमद भगवद कथा
धर्मार्थ समिति (भारत)
ग्राम कैथा, पोस्ट
अमिलिया, थाना गढ़,
जिला रीवा (म.प्र.) पिन ४८६११७
मोबाइल नंबर – 07869992139, 09589152587


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