स्थान – कैथा, गढ़ (रीवा, म.प्र.), दिनांक: 04.09.2016, दिन रविवार,
यज्ञ स्थली कैथा के अति
प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में प्रतिवर्ष हरितालिका तीज के अवसर पर आयोजित
होने वाला परंपरागत मेला धूम धाम के साथ चल रहा है. खुले मौसम में भारी जनमानस का
जमावड़ा.
विषय – यज्ञ स्थली कैथा के श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण प्रतिवर्ष हरितालिका
तीज के अवसर पर आयोजित होने वाला मेला धूम धाम के साथ चल रहा है. खुले मौसम में
भारी जनमानस का जमावड़ा.
(कैथा,
रीवा) भारत देश पर्वों और
त्योहारों का देश है. यहाँ की संस्कृति में पर्व और त्यौहार इसके अंग-प्रत्यंग में
बसे समाये हुए हैं. हिन्दू सनातन संस्कृति में विशेष तौर पर हर माह कोई न कोई
त्यौहार आपको मिल ही जाएगा. माह का आधा समय कोई न कोई व्रत उपवास और तीज त्योहारों
में ही जाता है और यही हमारी इस भारतीय संस्कृति को विशिष्ट दर्ज़ा भी देती है.
हरितालिका तीज की ऐतिहासिक और धार्मिक
पृष्ठभूमि -
विशेषतौर पर श्रावण मास से प्रारंभ होकर दीपावली
तक चलने वाले इन मानसूनी त्योहारों का कुछ ज्यादा ही महत्व रहता है. भारत ऋतुओं का
देश है. यहाँ पर वर्षा ऋतु अपना एक विशेष महत्व रखती है. मानसून के आते ही वर्षा
ऋतु का आगाज़ हो जाता है और उसके साथ ही प्रारंभ होता है तीज त्योहारों का सिलसिला.
मानसून और वर्षा के साथ भारत का जुडाव सनातन है. यहाँ के धर्म-ग्रंथों से लेकर आदि
काल तक की संस्कृति में इसका बड़ा ही मनोहारी वर्णन आता है. इसी कारण से भारत को
कृषि प्रधान देश भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ पर मानसून और बारिस के साथ ही खेती-बाड़ी
भी प्रारंभ हो जाती है. ज्यादातर त्यौहार खेती किसानी से ही जुड़े हुए हैं. जैसे
हरितालिका तीज और हरछठ का त्यौहार किसानों से ज्यादा जुड़े हुए हैं. हरितालिका तीज
का इतिहास बहुत पुराना और हमारे धर्म ग्रंथों से भी जुड़ा हुआ है. ऐसी मान्यता है
की माता पार्वती ने भगवान् शिव को पति रूप में प्राप्ति हेतु नारद मुनि के कहने पर
अत्यंत कठिन तपस्या और निर्जला व्रत रखकर भगवान् शिव को प्रसन्न कर उन्हें अपने
पति स्वरुप प्राप्त किया था और तब जाकर कार्तिकेय का जन्म हुआ और भयानक असुर-दैत्य
का वध कर मानव-देव-संत-मुनिओं का संताप दूर हुआ.
चूंकि ज्यादातर तीज-त्यौहार हमारे धर्म ग्रंथों
और पौराणिक आख्यानों प्रसंगों पर आधारित हैं अतः हरितालिका तीज का त्यौहार भी इसी
पार्वती-शिव कथा प्रसंग पर आधारित है. इसमें नवयुवतियां और शादी-सुदा महिलाएं दोनों
कठिन निर्जला व्रत रखकर अपने पातियों और होने वाले पातियों के लिए अच्छी कामनाएं
करती हैं की उन्हें भी ईश्वर पार्वती-शिव जैसी ही आदर्श जोड़ियाँ बनायें इस प्रकार.
कैथा की पावन भूमि पर तीजा पर यह मेला सदियों
पुराना -
यज्ञों की पावन स्थली कैथा के प्राचीन श्री
हनुमान मंदिर प्रांगण में हरितालिका तीज के अवसर पर पिछली सदियों से मेला चलता आ
रहा है. यहाँ पर बुजुर्ग ग्रामीण जनों से इस विषय में चर्चा की गयी तो पता चला की
नब्बे वर्ष से ऊपर का भी बुजुर्ग यही बताता है की उसके बचपन की जानकारी से
परंपरागत रूप से कैथा के श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में तीजा का मेला चलता आ रहा
है.
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शिवानन्द द्विवेदी
(प्रचारक, प्रवक्ता,
एवं राष्ट्रीय संयोजक)
श्रीमद भगवद कथा
धर्मार्थ समिति (भारत)
ग्राम कैथा, पोस्ट
अमिलिया, थाना गढ़,
जिला रीवा (म.प्र.) पिन ४८६११७
मोबाइल नंबर – 07869992139

































































































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