दिनांक 11/01/2017 रीवा मप्र,
श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण कैथा में परंपरागत रूप से आयोजित होने वाले
श्रीराम चरित मानस का कल से होगा आयोजन
(गढ़, रीवा मप्र) भारतीय संस्कृति में श्रीराम जी का चरित्र अत्यंत पावन और पुनीत है. श्रीराम एक आदर्श भ्राता, आदर्श पुत्र, आदर्श शिष्य, आदर्श मित्र, आदर्श पति, आदर्श प्रशासक, आदर्श पिता, और यहाँ तक की आदर्श शत्रु भी थे. जी हाँ उन्होंने शत्रु की मर्यादा को भी नहीं लांघा. रावण जैसे घोर असुर-दैत्य को भी उन्होंने भरपूर मौका दिया की वह समझ जाए की किससे युध्य कर रहा है परन्तु विनाश का समय आने से जैसे मानव की बुद्धि विपरीत कार्य करती है वैसे ही रावण के साथ भी हुआ. पर श्रीराम जी ने उस मर्यादा का भी उल्लंघन कभी नहीं किया. श्रीराम जी ने असुरों की पत्नियों और कन्याओं का भी निरादर कभी नहीं किया और उनके ऊपर किसी भी प्रकार के अत्याचार नहीं होने दिया क्योंकि वह मर्यादा की प्रतिमूर्ति और धर्म के हेतु अवतरण लिए थे अतः उनका कोई भी कृत्य ऐसा नहीं जिसमे आज भी कोई प्रश्न कर सके. अब वह बात अलग है की कुछ आलोचक बिना किसी कारण भी श्रीराम जी के गूढ़ लीला रहस्यों को समझे बिना सीता अग्निगमन, श्रीराम का पत्नी सीता त्याग आदि पर प्रश्न उठाते रहते हैं. श्रीराम मर्यादा की प्रतिमूर्ति थे इसीलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा गया. श्रीराम जी के चरित्र का पहला वखान बाल्मीकि कृत रामायण में आता है जो संस्कृत महाकाव्य की श्रेणी में रखा गया है. इसके उपरांत तो इसका अनुवाद लगभग विश्व की हर विकसित भाषा में हुआ है. वर्तमान काल में जो सबसे प्रचलित काव्य ग्रन्थ है वह है तुलसीकृत श्रीरामचरितमानस है जो अवधी भाषा में लिखा गया है. अवधी भाषा देवनागरी लिपि से सम्बंधित है और हिंदी तथा उसकी उपभाषाओं से मेल रखती है और हिन्दीभाषी क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय है.
वहरहाल श्रीराम जी के चरित्र के विषय में कुछ भी कहना अथवा लिखना सूर्य के समक्ष दीपक दिखाने जैसा कृत्य है परन्तु फिर भी बारम्बार उनके पावन चरित्र का वखान कर स्मरण करने से प्रभु जैसे बनने की प्रेरणा मिलती है. और निश्चितरूप से आज तुलसीकृत रामचरितमानस की चौपाईयों को गाकर सुनने और सुनाने के पीछे भी यही उद्येश है. ज्ञानियों द्वारा कथन है की श्रीरामचरितमानस का हर एक दोहा और चौपाई मन्त्र की तरह है. उसके स्मरण और गायन से समस्त अधिभौतिक, अधिदैविक, और अध्यात्मिक तापों अर्थात कष्टों का विनाश हो जाता है.
पूर्णिमा के पावन अवसर पर कैथा के श्रीहनुमान मंदिर प्रांगण में होगा मानस का कार्यक्रम
परंपरागत रूप से आयोजित होने वाले श्रीराम चरित मानस कार्यक्रम का आयोजन हिन्दू पंचांग की प्रत्येक पूर्णिमा को होता आया है. यह आयोजन इस बार दिनांक 12 से 13 जनवरी 2017 को होगा जो पुरे चौबीस घंटे तक चलेगा. ज्ञातव्य हो की कैथा की पावन भूमि पर श्री हनुमान मंदिर प्रांगन में विभिन्न धार्मिक आयोजन समय समय पर होते रहते हैं. मानस का यह कार्यक्रम श्री सिद्धमुनि द्विवेदी उपाध्यक्ष श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति (भारत) के तत्वावधान में होगी.
यज्ञों की पावन स्थली कैथा के अति प्राचीन श्री हनुमान मंदिर प्रांगण में दिनांक 12-13 जनवरी को मानस के कार्यक्रम में आप सभी को सादर आमंत्रित किया जाता है.
शिवानन्द द्विवेदी
(प्रचारक, प्रवक्ता, एवं राष्ट्रीय संयोजक)
श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति (भारत)
ग्राम कैथा, पोस्ट अमिलिया, थाना गढ़,
जिला रीवा (म.प्र.) पिन ४८६११७
!!!जय गौमाता की !!!

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