दिनांक 19 अक्टूबर 2018, स्थान - गढ़/गंगेव रीवा मप्र
(कैथा श्रीहनुमान मंदिर से, शिवानन्द द्विवेदी)
परंपरागत रूप से प्रत्येक शारदीय नवरात्र के शुभवसर पर पावन पुनीत यज्ञस्थली कैथा श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में दशकों से आयोजित होने वाले दुर्गोत्सव 2018 का भक्तिभाव पूर्ण समापन होने की कगार पर है. दिनाँक 18 अक्टूबर को जहां कन्याभोज, हवन एवं सूक्ष्म भंडारे का आयोजन हुआ वहीं दिनाँक 19 अक्टूबर को दुर्गोत्सव के दशवें दिन दशहरे के दिन वृहद भंडारे का आयोजन किया गया.
भंडारे का प्रसाद लेने दूरदराज से पधारे श्रद्धालुगण
इस बीच नवरात्र के अवसर पर दशहरे पर आयोजित भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने दूरदराज से भक्त श्रद्धालुगण पधारे जिंसमे सभी आयु वर्ग के लोग माताएं, बहनें, बच्चे, बालक, बालिकाएं सभी सम्मिलित हुए.
भारतीय संस्कृति में किसी भी धार्मिक आयोजन में भंडारे का अपना एक विशेष महत्व होता है. अतः मान्यता अनुरूप सभी भक्त श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने आते हैं.
सार्वजनिक सहयोग से होते हैं यह कार्यक्रम
यह सभी कार्यक्रम श्रीमद भगवद कथा धर्मार्थ समिति भारत के तत्वावधान में सार्वजनिक सहयोग से सम्पन्न कराए जाते हैं. जन जन के सहयोग से जो भी प्राप्त होता है वह माता श्री के चरणों में अर्पण कर दिया जाता है. आसपास के सैकड़ों ग्रामो से जुड़े हुए भक्त श्रद्धालुओं का यह मानना है की श्रीहनुमान मंदिर प्राँगण में आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों में कलयुग के देवता पवनपुत्र श्री बजरंगबली जी की महती कृपा होती है. सभी कार्यक्रम श्रीहनुमान जी के संरक्षण में सम्पन्न होते आये हैं.
इन सहयोगियों का रहा विशेष योगदान
वैसे तो कलयुग के अधिष्ठाता देवता श्रीहनुमान जी के मंदिर प्राँगण कैथा में आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों में सार्वजनिक रूप से सभी जन मानस का अपना अंश एवं सहयोग रहता है. जिसकी जितनी बनती है वह यथाशक्ति तन मन धन से अपना सहयोग करता है, फिर भी विशेष रूप से जिन सहयोगियों के प्रभु प्रेरणा से श्रीदुर्गोत्सव 2018 में बढ़चढ़कर भाग लिया और अपना हर संभव मनसा कर्मणा वाचा सहयोग दिया उनमे से कार्यक्रम के संयोजक अरुणेंद्र पटेल एवं नंदलाल केवट, पुरोहित आचार्य संपूर्णानंद द्विवेदी, पंडा आदित्य पटेल एवं महेश पटेल, सहयोगी राजेन्द्र तिवारी मदरी, यदुवंश मिश्रा, राजेन्द्र तिवारी गढ़, महेंद्र उर्मलिया, अच्चू द्विवेदी, छोटकउ पांडेय, देवराज जायसवाल, चंद्रमणि केवट, रामनरेश पटेल, हरिबंश पटेल, सिद्धमुनि द्विवेदी, भैयालाल पांडेय, विशेषर, रंगदेव, गोकुल, वृजभान, सतानंद, रज्जन, शिवा, रोहित, कैप्टेन, आशीष, उग्रभान आदि रहे.
टमस नदी में प्रवाहित होंगी माता की पार्थिव प्रतिमा
श्री दुर्गोत्सव 2018 की समाप्ति पर मातारानी की पार्थिव प्रतिमा के विषर्जन हेतु टमस नदी ले जाकर प्रवाहित किया जाएगा एवं तदुपरांत गंगा मैया के स्वच्छ जल में भक्त जाकर स्नान करेंगे.
2 बजे से आयोजित हुआ भंडारा
श्रीदुर्गोत्सव 2018 का अंतिम भंडरा एवं प्रसाद वितरण 19 अक्टूबर 2018 को दोपहर बाद 2 बजे से प्रारम्भ किया जाकर भक्त श्रद्धालुगणों के अंतिम आगमन तक चलता रहा. इस बीच हज़ारों की संख्या में भक्त श्रद्धालुगण प्रसाद ग्रहण करने उपस्थित हुए.
अच्छाई की बुराई पर जीत का पर्व है दशहरा
भारतीय संस्कृति में दशहरे का त्योहार प्राचीनकाल से चला आ रहा है. रामायण की परम्परा अनुसार जब भगवान श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त कर रावण जैसे घोर आसुरी शक्ति का अंत किये थे तब से दशहरे का पर्व सम्पूर्ण भारतीय समाज में हर्षोल्लाश के साथ मनाया जा रहा है.
दशहरा अच्छाई का बुराई पर जीत, सत्य की असत्य पर विजय और धर्म की अधर्म की विजय का प्रतीक है क्योंकि इसी अवसर पर भगवान श्रीराम रूपी धार्मिक और सत्यस्वरूप शक्ति अधर्म अनाचार, अत्याचार का प्रतीक बनी रावण-मेघनाद-कुम्भकर्ण रूपी आसुरी शक्ति पर विजय प्राप्त किये और तत्पश्चात यह पर्व मनाया जाने लगा.
श्रीमद देवी भागवत की अन्य मान्यताओं के अनुसार ऐसा भी माना जाता है की देवी के 9 स्वरूपों द्वारा जब भीषण युद्ध के पश्चात महिषासुर, शुम्भ-निशुम्भ, मधु-कैटभ आदि आसुरी शक्तियों का अंत किया उसी के उपलक्ष्य पर भी दशहरे का पावन त्योहार मनाया जाता है. इसी प्रकार दशहरे के संदर्भ में अनेकानेक कथा प्रसंग विभिन्न भारतीय प्रथाओं एवं लोक परंपराओं के अनुरूप प्रचलित हैं जिनमे से सभी में एक ही बात आती है की दशहरे का पावन पर्व सत्य की असत्य पर धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है.
दसहरे पर रावण कुम्भकर्ण एवं मेघनाद के पुतला दहन का होगा कार्यक्रम
श्रीदुर्गोत्सव 2018 की समाप्ति पर दशहरे के दिन 19 अक्टूबर 2018 को रात्रि रावण कुम्भकर्ण एवं मेघनाद के पुतले दहन किया जाएगा. इस बीच हर वर्ग के लोगों में कार्यक्रम को लेकर काफी उत्साह का माहौल है.
दशहरे का आध्यात्मिक तात्पर्य
आध्यात्मिक दृष्टि से व्याख्यान करने वाले ज्ञानियों का कहना है की दशहरे का यदि संधि विक्षेद किया जाय तो इसके दश एवं हर शब्द आते हैं. दश का तात्पर्य हमारी दशों इंद्रियों से है जबकि हर शब्द भवन हरि विष्णु या हर शिव का नाम है. इस प्रकार जब नवरात्रि के 9 दिनों तक सतत आध्यात्मिक योग प्रक्रिया से गुजरकर मॉनव अपने मूलाधार चक्र से प्रारम्भ कर छह चक्रों का भेदन कर मस्तक में शहस्रार चक्र में पहुचता है तब वह सांसारिक माया से मुक्त होकर दशों इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर लेता है. इस प्रकार अपनी समस्त कामनाओं एवं दशों इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने वाला मानव योगी बन जाता है और योग की उस अवस्था में दशवें दिन अर्थात विजयादशमी के दिन वह हर या हरि को प्राप्त कर लेता है इस प्रकार दशहरे के दिन योगी समस्त इंद्रियों मनादि पर विजय प्राप्त कर जीवन्मुक्त हो जाता है.
संलग्न - संलग्न तस्वीरों में देखें विजयादशमी दशहरे के दिन आयोजित भंडारे के कार्यक्रम के दौरान उपस्थित भक्त श्रद्धालुगण.
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शिवानन्द द्विवेदी
(सामाजिक कार्यकर्ता)
ज़िला रीवा मप्र, मोबाइल
9589152587, 7869992139
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